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8 फरवरी को क्या वाकई बन रहा है कोई अद्भुत संयोग? काशी के ज्योतिषियों ने बताया सच

2588 वर्षों के बाद अद्भुत संयोग की खबरों को काशी के ज्योतिषियों ने नकार दिया है. इनका कहना है कि ये सब सिर्फ ज्योतिष को बदनाम करने के लिए है और ज्योतिष के जरिए राजनैतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है.

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ज्योतिषियों ने 2588 वर्षों के बाद के संयोग की खबरों का खारिज किया है
ज्योतिषियों ने 2588 वर्षों के बाद के संयोग की खबरों का खारिज किया है

हाल में खबर आई थी कि इस बार 8 फरवरी को 2588 सालों बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि इस दिन किया गया अचूक टोटका लोगों की जिंदगी बदल देगा. खबर के अनुसार 8 फरवरी के दिन सूर्योदय से पहले घर साफ करने, पुरानी झाड़ू फेंकने और लोगों के बीच कमल का फूल बांटने जैसे कुछ और टोटके करने से कई बीमारियां दूर हो जाएंगी.

अब इन अद्भुत संयोग की खबरों को काशी के ज्योतिषियों ने नकार दिया है. इनका कहना है कि 8 फरवरी के दिन ऐसा कोई भी संयोग नहीं बन रहा है और ये सब सिर्फ ज्योतिष को बदनाम करने के लिए है. ज्योतिषियों का कहना है कि 8 फरवरी को दिल्ली में चुनाव हैं और इस अफवाह के जरिये राजनैतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है.

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ज्योतिष पवन त्रिपाठी का कहना है कि ऐसा कोई भी संयोग नहीं बन रहा है, चूंकि ज्योतिष एक विज्ञान है और ऐसा कुछ संयोग बनता तो ज्योतिष विज्ञान भी उसे स्वीकार करता. ग्रहों की गति पर ही योग बनते हैं, लेकिन ऐसा कोई योग 8 फरवरी को बन ही नहीं रहा है. पवन त्रिपाठी का कहना है कि इस संयोग में झाड़ू को फेंकने और कमल के फूल को सिर के ऊपर घुमाने जैसी कही गईं बातें निरर्थक हैं.

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ज्योतिषियों का कहना है कि इन सब बातों के जरिए भ्रांति फैलाई जा रही है और इसका ज्योतिष विज्ञान से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है. ज्योतिष शास्त्र इसका खंडन करता है. जहां तक इसमें बनी कुंडली की बात है तो उसमें भी कुछ योग बनता नहीं दिख रहा है.

एक अन्य ज्योतिषी और काशी विद्वत परिषद् के संगठन मंत्री आचार्य ऋषि द्विवेदी ने बताया कि ज्योतिष को वेदों का नेत्र कहा जाता है. जहां तक 2588 वर्षों बाद 8 फरवरी को बनने वाले योग की बात है तो ऐसे योग हर 2-3 साल में बनते रहते हैं और ये एक भ्रामक प्रचार है. ऐसा लग रहा है कि ज्योतिष के जरिए एक राजनैतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है. ऋषि द्विवेदी का कहना है कि ये ज्योतिष की आड़ में राजनैतिक शरारत करने की कोशिश है.

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