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देवउठनी एकादशी पर इस देव प्रबोधन मंत्र से जागते हैं विष्णु भगवान

आज के दिन कुछ मंत्रों का जाप कर भगवान विष्णु को निद्रा से उठाया जाता है.

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देवउठनी एकादशी
देवउठनी एकादशी

आज देवउठनी एकादशी यानी देव प्रबोधिनी एकादशी मनाई जा रही है. माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार माह की लंबी निद्रा के बाद जागते हैं. हिंदू परंपराओं के मुताबिक, इस दिन भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम की शादी तुलसी से होती है.

आज के दिन कुछ मंत्रों का जाप कर भगवान विष्णु को निद्रा से उठाया जाता है. मान्यता है कि देव प्रबोधन मंत्र से दिव्य तत्वों की जागृति होती है. आइए जानते हैं उन मंत्रों के बारे में.

देव प्रबोधन मंत्र

ब्रह्मेन्द्ररुदाग्नि कुबेर सूर्यसोमादिभिर्वन्दित वंदनीय,

बुध्यस्य देवेश जगन्निवास मंत्र प्रभावेण सुखेन देव।

अर्थात- ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, अग्नि, कुबेर, सूर्य, सोम आदि से वंदनीय, हे जगन्निवास, देवताओं के स्वामी आप मंत्र के प्रभाव से सुखपूर्वक उठें.

उदितष्ठोतिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते,

त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत्सुप्तं भवेदिदम्‌।

उत्थिते चेष्टते सर्वमुत्तिष्ठोत्तिष्ठ माधव॥

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अर्थात- हे गोविंद! आप जग जाइए. आप निद्रा का त्याग कर उठ जाइए. हे जगन्नाथ! आपके सोते रहने से यह सम्पूर्ण जगत सोता रहेगा. आपके उठने पर सभी लोग कार्यों में प्रवृत्त हो जाएंगे. हे माधव! उठ जाइए.

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