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धर्म

'भूतों' से सामना करने वाले इन भारतीय अफसरों की आपबीती!

'भूतों' से सामना करने वाले इन भारतीय अफसरों की आपबीती!
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अगर आप उस तरह के शख्स हैं जो घर पर अकेले होने पर भूत-प्रेतों के बारे में गूगल पर सर्च तक करने की हिम्मत नहीं करते हैं या अगर रात में अचानक एक चाकू के गिरने की आवाज से भी आपकी घिघ्घी बंध जाती है.  कोई चीज हिलने पर आपको भूत-प्रेतों का डर सताने लगता है और पूरी रात भर सो नहीं पाते हैं तो फिर आप आगे इस आर्टिकल को ना ही पढ़ें क्योंकि रियल लाइफ की ये पैरानॉर्मल ऐक्टिविटीज आपकी नींद कई रातों के लिए उड़ा सकती हैं.


'भूतों' से सामना करने वाले इन भारतीय अफसरों की आपबीती!
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हमारे देश में छोटा ही सही लेकिन एक ऐसा समुदाय है जो भूत-प्रेत और आत्माओं के अस्तित्व में विश्वास रखता है. कुछ लोग आज भी मानते हैं कि मानव जीवन से परे कुछ ऐसी शक्तियां हैं जो अस्तित्व में होती हैं.  जो लोग ऐसी चीजों में यकीन रखते हैं, वे भूतों और आत्माओं के साथ कई बार संवाद करने की भी कोशिश करते हैं.  यहां तक कि आप भले ही भूत प्रेत में यकीन करें या ना करें लेकिन पैरानॉर्मल घटनाओं में विश्वास रखने वाले  आपको सलाह देते हैं कि आप उनका भूलकर भी मजाक नहीं उड़ाए. भारत में कई पेशेवर पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर्स हैं जिन्होंने भूतों प्रेतों का साक्षात्कार करने का दावा किया है. इन जांचकर्ताओं ने कई वर्षों तक इस क्षेत्र में अध्ययन करने के बाद कई हैरान करने वाली कहानियां शेयर की हैं.

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लोनावाला का डरावना वाकया-

इंडियन पैरानॉर्मल टीम के अक्षय स्थलेकार दावा करते हैं कि वह पिछले 8 सालों से पैरानॉर्मल घटनाओं की जांच कर रहे हैं. स्थलेकर की टीम पुणे और लोनावाला में नियमित तौर पर 'घोस्ट वॉक'  का आयोजन करती है. इस वॉक का मकसद रोजाना ऐसी भुतही जगहों के रात में चक्कर लगाकर कुछ आत्माओं या भूत प्रेत के कृत्यों को कैमरे में कैद करना होता है. मुंबई के सुदूर इलाके में स्थित लोनावाला मॉनसून और सर्दियों में कपल्स के लिए तो स्वर्ग तो है ही लेकिन इससे भूत-प्रेतों की खौफनाक कहानियों से भी गहरा नाता रहा है. लोनावाला की पहाड़ियों में एक ऐसी ही 'घोस्ट वॉक' के दौरान स्थलेकर को कुछ ऐसा नजर आया जो किसी भी तरह की वैज्ञानिक व्याख्या से बाहर था.
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स्थलेकर जब अपनी टीम के साथ राउंड पर थे तभी उनकी कार पर दो बार तेजी से नॉक हुआ और उसी के बाद उनकी कार अचानक से हिल गई. यह एक मध्य रात्रि थी.  रात में हवा चल रही थी. स्थलेकर और उनकी टीम के 4 लोग एक छोटी कार में यात्रा कर रहे थे और सिगरेट पीने के लिए कार से बाहर निकले थे.  टीम उसी जगह पर थी जहां पर दिन में काफी लोग घूमने आते हैं. स्थलेकर बताते हैं, हवा पूरब से पश्चिम बह रही थी, तभी अचानक एक शराब की खाली बॉटल जमीन से तेज गति से हवा की दिशा के विपरीत ऊपर उठ गई. उनकी टीम को लगा कि कुछ अप्राकृतिक या पैरानॉर्मल ऐक्टिविटी हो रही है.
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इस समय तक स्थलेकर और उनके दोस्त कार में अंदर आ गए थे. जल्द ही उनकी कार के शीशे पर दो बार तेजी से नॉक की आवाज सुनाई दी जबकि वहां पर कोई नहीं था. तभी कार अचानक से इतनी तेजी से हिली जैसे कार ना हो कोई टिन का बिस्किट. हम लोग बैठ गए और अपनी डिवाइसों को जल्दी से ऑन कर लिया जो आत्माओं के होने का संकेत देती हैं. मशीनें लगातार ब्लिंक कर रही थी.
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इस टीम के दावे के मुताबिक, उन्होंने एक ऐप का भी इस्तेमाल भी किया जिसे अमेरिकियों ने विकसित किया था. इस ऐप के जरिए पैरानॉर्मल गतिविधियों की भी आवाज रेकॉर्ड होती है. स्थेलकर ने बताया था, इस रिकॉर्डर में मराठी में बोलती हुई एक महिला की आवाज आ रही थी लेकिन यह आवाज बहुत ही रफ और खराब थी.
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स्थलेकर ने कहा कि वह उससे कुछ और सवाल पूछना चाहते हैं, क्या वह मुक्ति पाना चाहती हैं लेकिन फिर वह गायब हो गई.
थोड़ी देर तक डरावनी आवाजें आती रही और कुछ मिनटों के बाद जाकर सब कुछ सामान्य हुआ.

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बेंगलुरु की एक महिला जिसका एक हिस्सा दूसरे हिस्से से 6 इंच लंबा था!-टीम पेंटेकल के डायरेक्टर और लीड इन्वेस्टिगेटर डॉक्टर राहुल कुमार ने मेडिसिन की पढ़ाई की और पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर बनने से पहले अपनी डिग्री भी ली थी. वह अपना ही एक अनुभव बताते हैं. कई लोगों की तरह वह भी भूतों और प्रेतों में यकीन नहीं रखते थे. उनकी लाइफ में साइंस के अलावा कुछ और नहीं था जिस पर उनका विश्वास रहा हो. हालांकि कुमार और उनके दोस्तों की एक हैलुइन पार्टी के बाद उनके साथ कुछ ऐसा हुआ जिससे उनका पूरा का पूरा नजरिया बदल गया.
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कुमार बताते हैं, 2007 में उनके कुछ दोस्त ओइजा बोर्ड का इस्तेमाल करना चाहते थे. हमने लगातार 6 बार ओजा सेशन किए लेकिन उस दिन कुछ नहीं हुआ. मुझे पूरी तरह से यकीन हो गया था कि यह सब केवल कोरी कल्पनाएं हैं. लेकिन उसके बाद जो कुछ भी हुआ, उसके लिए कुमार बिल्कुल भी तैयार नहीं थे. पार्टी के दो दिन बाद की बात है जब कुमार उठे तो उनके दाएं हाथ पर तीन घाव के निशान थे जिससे खून निकल रहा था. हैरानी की बात तब हुई जब अगले दिन ड्रेसिंग के लिए बैंडेज खोला गया तो निशान पूरी तरह से गायब थे,.
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अगले दिन सुबह हुई तो फिर से उसके उसी हाथ पर वैसे ही निशान थे और पिछली बार की ही तरह निशान गायब भी हो गए. यह सिलसिला लगातार तीन दिन तक चलता रहा. कुमार बताते हैं, मुझे अब भी लग रहा था कि मुझे कुछ गलतफहमी हो रही है या मुझे कुछ मतिभ्रम हो गया है. इसी दौरान मुझे बेंगलुरु से एक आवाज आने के सपने भी आ रहे थे. यह वही जगह थी जहां में रहा करता था. मैं अपने दोस्तों के साथ उस जगह पर गया. मुझे आज तक याद नहीं कि वहां जाते ही मेरे साथ क्या हुआ था. कुमार के एक दोस्त ने बताया था कि उस जगह पर पहुंचते ही बेहोश हो गया था. कुमार का दावा है कि प्रसिद्ध पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर गौरव तिवारी ने उनकी बहुत मदद की थी.  बाद में गौरव तिवारी की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी. हालांकि वह बताते हैं कि हॉरर फिल्मों में दिखाए जाने वाले से सब कुछ बहुत अलग होता है.
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कुमार एक और असामान्य घटना के बारे में बताते हैं. बेंगलुरु की एक महिला को अजीब सी बीमारी थी. मेडिकली इसे डेलिरियम (अचेतन अवस्था में बोलने की आदत) कह सकते हैं लेकिन मुझे उस महिला में कुछ असामान्य सा लगा. जब वह जमीन पर पड़ी हुई थी तो हमने नोटिस किया कि उसके शरीर का एक हिस्सा दूसरे हिस्से से करीब 6 इंच ज्यादा लंबा था. हालांकि यह मसल्स की कई बीमारियां होती हैं लेकिन 6 इंच का फर्क बहुत ज्यादा होता है और ऐसे मामले मेडिकल में सामने नहीं आए हैं.



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तेज आवाजें करने वाली आत्मा जिसने एक बच्चे को खूब तड़पाया-
यह कहानी कोलकाता शहर के एक परिवार की है. इंडियन स्पेक्टर पैरानॉर्मल सोसायटी, वेस्ट बंगाल के अविजीत सरकार ने भी अपनी जांच के दौरान पैरानॉर्मल ऐक्टिविटी से जुड़ा एक खौफनाक अनुभव साझा किया था. वह करीब एक दशक से भूतों-प्रेतों की गतिविधियों का अध्ययन कर रहे हैं.  सरकार बताते हैं,  कुछ साल पहले मुझे आधी रात को एक आदमी का फोन आया. वह बहुत ही थके हुए और परेशान लग रहे थे. वह कोलकाता के रहने वाले थे.
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सरकार के मुताबिक,  वह आदमी एक बहुत ही अजीब समस्या से परेशान था. वह अपने भतीजे को करीब एक सप्ताह से कुछ खिला नहीं पा रहे थे. उनके मुताबिक, जब भी कोई बच्चे के सामने खाना लाता तो खाने के बर्तन उड़कर दीवार से चिपक जाते, जबकि वहां कोई नजर नहीं आता था. आदमी बहुत ज्यादा डरा हुआ था क्योंकि ना तो कोई उनका यकीन करता था और ना ही उनकी परेशानी को समझता. हर कोई ऐसी बात सुनकर उनका मजाक उड़ाने लगता था.
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सरकार ने उनसे विडियो एविडेंस देने के लिए कहा. जब सरकार ने विडियो देखा तो पाया कि कुर्सी और चप्पलें बिना किसी के छुए अपने आप एक जगह से दूसरी जगह चली जाती थी. जब बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाया गया तो उसने तीसरे व्यक्ति के तौर पर बात की. उसने यह भी कहा कि दवाइयां उसे ठीक नहीं कर सकतीं. सरकार ने इस घटना की जांच शुरू की. सरकार ने पाया कि शुरू में बच्चा शांत था लेकिन जब उन्होंने उससे सवाल पूछने शुरू किए तो वह बहुत तेज चीखने-चिल्लाने लगा. चार लोगों के लिए भी उसे बस में करना असंभव था.  सरकार की टीम ने चाय बनाई और उसमें जादुई नमक डाला. बड़ी मुश्किल के बाद बच्चे को चाय पिलाई गई और तब जाकर वह शांत हुआ.
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सरकार ने जब बच्चे के अंदर रह रही आत्मा से सवाल पूछने शुरू किए तो उसने बताया कि अगर उसने बच्चे का शरीर छोड़ा तो वह जलकर राख हो जाएगा. उसने यह भी बताया कि परिवार के ही किसी जानने वाले ने उस बच्चे के अंदर प्रवेश करने के लिए काला जादू किया था. इस बातचीत के दौरान स्पिरिट बेचैन तो थी लेकिन हिंसक गतिविधियां नहीं कीं. इससे उसके पैरंट्स को लगा कि साल्ट टी से बच्चा ठीक हो गया. वे अपने बच्चे को लेकर चले गए. मुझे नहीं पता कि बाद में उस बच्चे का क्या हुआ.
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एक महिला जो 15 मिनट बाद की घटनाओं की कर देती थी भविष्यवाणी-


इंडिपेंडेंट पैरानॉर्मल रिसर्चर निर्वाण आनंद एक अजीब वाकये को याद करते हैं. वह बताते हैं कि मुंबई के पंचगनी की एक महिला दावा करती थी कि अगले 15 मिनट में क्या होने वाला है, उसे स्पष्ट तौर पर देख सकती हैं. वह बहुत ही ज्यादा हाइपरऐक्टिव थी और उसके घर वाले बिल्कुल भी समझ नहीं पा रहे थए कि उसके साथ क्या हो रहा था. पहले तो घर वालों ने उसे सीरियसली ही नहीं लिया उन्हें लगा कि वह उसके साथ मजाक कर रही है. लेकिन जब उसने बताया कि अगले 15 मिनट में क्या होने वाला है और वही घटनाएं अगले 15 मिनट में हुईं तो घर वालों के होश उड़ गए. जल्द ही उसने खाना पीना बंद कर दिया. उसका इलाज करने की कोशिश की गई लेकिन कुछ काम नहीं आया. महिला को एक पवित्र ताबीज दिया गया और दैवीय शक्तियों से संबंधित चीजें दी गई तब जाकर आत्मा ने उसका शरीर छोड़ा.

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एक आत्मा जो अपने रेप और मर्डर का बदला लेना चाहती थी-
आनंद का सामना एक और अजीब मामले से हुआ था. महाराष्ट्र के मेंटल हेल्थ फैसिलिटी में करीब 9 सालों से एक लड़की का इलाज हो रहा था पर वह ठीक होने के बजाए दिन पर दिन हिंसक होती जा रही थी. जब आनंद ने उससे मुलाकात की तो वह कांप रही थी और गुस्से में थी. आनंद बताते हैं, उसे किसी आत्मा ने पजेस कर लिया था. यह आत्मा एक महिला की थी जिसका रेप हुआ था और उसके बाद हत्या कर दी थी.
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लेकिन जब मैंने उससे कहा कि वह इस तरह से लड़की को उसी तरह टॉर्चर कर रही है जैसे उसे किया गया था. क्या उसे वह दर्द याद है तो फिर बेवजह वह किसी लड़की को क्यों परेशान कर रही है. वह उस लड़की के शरीर के जरिए अपनी मौत का बदला लेना चाहती थी. आनंद कहते हैं, हालांकि इस तरह की आत्माओं से छुटकारा पाना आसान नहीं था, लेकिन यह जानकर कि उसके गुनहगारों की मौत पहले ही हो चुकी है, उसने शरीर को छोड़ दिया. आनंद बताते हैं कि अब वह लड़की अमेरिका में रह रही है. आनंद का मानना है कि हर आत्मा बुरी हो यह जरूरी नहीं है. कई बार जिंदा रहते हुए उनकी बहुत बुरी चीजों से गुजरना पड़ता है और इसीलिए मौत के बाद भी वह आत्मा के रूप में भटकती रहती हैं.
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