अंग्रजों से पहले इन्होंने बनवाया था यहां पुल-
ऐसा बताया जाता है कि इस पुल का निर्माण ब्रिटिश सरकार की देख-रेख में हुआ था, लेकिन अंग्रजों से पहले स्वामी विशुदानंद की प्रेरणा से कलकत्ता के सेठ सूरजमल ने यहां 1889 में लोहे की तारों से एक मजबूत पुल बनवाया था. यह पुल 1924 में बाढ़ में बह गया था, इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने नए सिरे से इसका निर्माण करवाया.