शास्त्रों के अनुसार रविवार को व्रत उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनकी कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर होने के कारण कमजोर स्वास्थय रहता है. इस व्रत के भगवान सूर्य है, जो नौ ग्रहों में से एक है. रविवार का उपवास भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है. इस व्रत से अच्छे स्वास्थ्य का और महिमा का आशीर्वाद मिलता है. सूर्य देव की पूजा, दान करने, और मंत्र आदि का जप करने से भी सूर्य और अन्य ग्रहों की शांति के लिए किया जा सकता है.
सभी ग्रहों में से सूर्य गृह को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है. सभी नौ ग्रहों के लिए अलग-अलग दिन चुना जाता है. रविवार उपवास सभी भाग्य, दीर्घायु लाने, आंख और त्वचा रोगों को कम करने, कुष्ठ रोग को दूर करने आदि इच्छाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है.
रविवार भगवान सूर्य या सूर्यनारायण को समर्पित है. रविवार के दिन का उपवास सूर्य देवता को समर्पित है. इस दिन का रंग लाल है. ये व्रत त्वचा से संबंधित परेशानियों पर काबू पाने के लिए किया जाता है. इस व्रत को लोग नए उद्यमों में आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए और सफलता के लिए भी मानते है.
जो लोग इस दिन का व्रत रखते है वो लोग दिनभर में सूर्यास्त से पहले केवल एक बार खाना खाते हैं. नमक, तेल और तले हुए खाद्य पदार्थों से परहेज करना पड़ता है.
जो व्यक्ति इस व्रत को रखते हैं, वो सुबह जल्दी उठकर अपनी दिनचर्या का काम स्नान आदि करके साफ कपड़े पहनकर पूजा के लिए तैयार होते है. सोने या अपने घर के एक शांतिपूर्ण इशान कोने में भगवान सूर्य की प्रतिमा या एक तस्वीर रखें.
इसके बाद भगवान की अगरबत्ती, फूल, दीपक आदि के साथ पूजा की जाती है.लाल रंग के फूल सूर्य भगवान की प्रार्थना करते हुए रखे जाते हैं. लाल रंग का चंदन का पेस्ट माथे पर तिलक के रूप में लगाया जाता है.
इस दिन के व्रत में अतिरिक्त देखभाल, शरीर की साफ-सफाई और आसपास के क्षेत्र की सफाई पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है.
त्वचा रोगों से राहत पाने के लिए लोग इस व्रत का पालन करते है. कई भक्त लोग इस दिन दान देकर व्रत का समापन करते है.