Tulsi Visarjan Vastu Niyam: हिंदू धर्म में तुलसी को केवल पौधा नहीं बल्कि माता का स्वरूप माना जाता है. शास्त्रों के मुताबिक, तुलसी जी को भगवान विष्णु का भी सबसे प्रिय माना जाता है, इसलिए इनका निरादर करना बहुत ही अशुभ होता है. जब तुलसी का पौधा सूख जाता है, तब कई लोग उसे सामान्य कचरे की तरह फेंक देते हैं, लेकिन यही सबसे बड़ी गलती मानी जाती है. मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से घर की सकारात्मक ऊर्जा कमजोर होती है और पूजा-पाठ का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है. तो आइए वास्तु शास्त्र के द्वारा जानते हैं कि सूखी तुलसी से जुड़ी कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए.
सूखी तुलसी से जुड़ी न करें गलतियां
- सूखी तुलसी को कभी भी कूड़ेदान में न फेंके.
- सूखी तुलसी को पैरों से रौंदना या सड़क पर फेंकना भी अशुभ माना जाता है.
- तुलसी जी की सूखी टहनियों को जलाना भी उचित नहीं माना जाता है, इसलिए ऐसी गलती न करें.
सूखी तुलसी को विसर्जित करने की विधि
सूखी तुलसी का विसर्जन करते समय सबसे पहले हाथ-मुंह धो लें और मन में श्रद्धा रखें. तुलसी की सूखी पत्तियों या पूरे पौधे को किसी साफ कपड़े या कागज में लपेट लें. इसके बाद उसे किसी नदी, तालाब या बहते जल में प्रवाहित करें. अगर बहता जल उपलब्ध न हो, तो किसी मंदिर के पास या घर के आंगन की मिट्टी में भी उसे दबाया जा सकता है. विसर्जन से पहले तुलसी माता को मन ही मन प्रणाम करें और धन्यवाद दें. चाहें तो 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप भी कर सकते हैं.
विसर्जन के लिए कौन-सा दिन होता है शुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूखी तुलसी को गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा या अमावस्या के दिन विसर्जित करना अच्छा माना जाता है. इन दिनों में किया गया विसर्जन दोष नहीं देता है और शुभ फल प्रदान करता है.