scorecardresearch
 

Sita Navami 2026: मां सीता के श्राप से आज तक मुक्त नहीं हुए ये 3 प्राणी, पढ़ें रोचक कथा

25 अप्रैल को सीता नवमी मनाई जाएगी. इस दिन माता सीता का पूरे विधि-विधान से पूजन किया जाता है. मान्यता है कि माता सीता ने अपने जीवनकाल में तीन प्राणियों को श्राप दिया था. ये प्राणी आज भी धरती पर सीता का श्राप भोग रहे हैं.

Advertisement
X
सीता नवमी पर माता सीता की विधिवत पूजा का विधान बताया गया है. (Photo: ITG)
सीता नवमी पर माता सीता की विधिवत पूजा का विधान बताया गया है. (Photo: ITG)

हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी का त्योहार मनाया जाता है. मान्यता है कि इसी तिथि पर माता सीता का प्राकट्य हुआ था. इस साल यह पर्व 25 अप्रैल यानी कल मनाया जाएगा. माता सीता भगवान राम की पत्नी थीं. उनके त्याग, समर्पण और अग्निपरीक्षाओं को आज भी दुनिया भूली नहीं है. इसलिए उनका नाम बहुत श्रद्धा के साथ लिया जाता है. क्या आप जानते हैं कि धार्मिक ग्रंथों में चार ऐसे प्राणियों को जिक्र मिलता है, जो आज भी माता सीता का श्राप भोग रहे हैं.

भगवान राम और लक्ष्मण जब वनवास के लिए गए, तो उनके वियोग का दुख राजा दशरथ सहन नहीं कर सके. पुत्रों से बिछड़ने के कुछ समय बाद ही उनका निधन हो गया. पिता के निधन का समाचार सुनकर राम और लक्ष्मण अत्यंत दुखी हुए. इसके बाद दोनों भाइयों ने वन में ही पिता का श्राद्ध और पिंडदान करने का संकल्प लिया.

श्राद्ध के लिए आवश्यक सामग्री एकत्र करने राम और लक्ष्मण निकल पड़े. उधर श्राद्ध का शुभ समय तेजी से निकल रहा था और दोनों भाई अभी तक लौटे नहीं थे. समय की गंभीरता को समझते हुए माता सीता ने स्वयं आगे बढ़कर अपने ससुर जिन्हें वह पिता समान मानती थीं, उनका विधिपूर्वक पिंडदान कर दिया. उन्होंने पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ श्राद्ध कर्म संपन्न किया.

इसके बाद जब राम और लक्ष्मण वापस लौटे, तो उन्होंने सीता से पूछा कि यह श्राद्ध का अनुष्ठान क्यों और कैसे संपन्न हुआ. तब माता सीता ने पूरा घटनाक्रम बताया और कहा कि उन्होंने पूरे विधि-विधान से उनके पिता का श्राद्ध किया है. सीता ने कहा कि श्राद्ध के समय वहां पंडित, गाय, कौवा और फल्गु नदी मौजूद थे. यदि विश्वास न हो तो इन सभी से सच्चाई पूछी जा सकती है.

Advertisement

जब भगवान राम ने इन चारों से घटना के बारे में पूछा तो, सभी ने झूठ कह दिया कि वहां कोई श्राद्धकर्म नहीं हुआ है. यह सुनकर राम और लक्ष्मण क्रोधित हो गए. तब माता सीता भी उनके झूठ से अत्यंत रुष्ट हो गईं और उन्होंने चारों को दंडस्वरूप श्राप दे दिया. श्राप देते हुए सीता ने कहा कि

सीता ने पंडित को श्राप दिया कि जीवन में कितना भी मिल जाए, लेकिन दरिद्रता तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ेगी. कौवे को श्राप मिला कि वह अकेले भोजन करके कभी तृप्त नहीं होगा और उसकी मृत्यु अचानक होगी. फल्गु नदी को श्राप दिया गया कि जल रहने पर भी वह ऊपर से सूखी दिखाई देगी. वहीं गाय को यह श्राप मिला कि उसे लोगों की जूठन तक खानी पड़ेगी.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement