Shakun Shastra: इंसान किसी भी धर्म का क्यों न हो, मृत्यु के बाद उसकी शव यात्रा निकाली ही जाती है. हिंदू धर्म में तो शव यात्रा को विशेष महत्व दिया गया है. चाहे किसी व्यक्ति ने लंबी उम्र के बाद संसार छोड़ा हो या उसकी अकाल मृत्यु हुई हो, दोनों ही स्थितियों में शव यात्रा निकाली जाती है. ऐसा माना जाता है कि शव यात्रा से न केवल मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि उसमें शामिल होने वाले लोगों की मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं.
आपने कभी न कभी रास्ते से गुजरते हुए किसी शव यात्रा को जरूर देखा होगा. कई लोग इसे देखकर डर जाते हैं और सोचते हैं कि उनका दिन खराब हो जाएगा. कुछ लोग तो शव यात्रा में शामिल किसी व्यक्ति का स्पर्श हो जाने पर घर जाकर स्नान भी करते हैं. कई लोगों के मन में यह भ्रम होता है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति भूत बन जाता है और उसकी आत्मा उनका पीछा कर सकती है. जबकि वास्तव में ऐसा कुछ नहीं होता है. अगर आप भी शव यात्रा को अशुभ मानते हैं, तो आपको बता दें कि हिंदू धर्म में इसे अशुभ नहीं, बल्कि शुभ माना गया है. यही नहीं, शास्त्रों में कुछ ऐसे कार्य बताए गए हैं जिन्हें शव यात्रा के दौरान करने से आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं.
सबसे पहली बात
अगर शव यात्रा किसी अपने या परिचित की है, तो उसे कंधा देने का प्रयास करें. ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. शास्त्रों के अनुसार, पिता की मृत्यु के बाद पुत्र और भाई को कंधा देना चाहिए. यदि वे न हों, तो समान जाति या गांव के लोग भी यह कर्तव्य निभा सकते हैं.
दूसरी बात
अगर आपको रास्ते में अचानक शव यात्रा दिख जाए और आप उसमें शामिल न हो पाएं, तो भी यह कोई अपशकुन नहीं है. बल्कि इसे शुभ संकेत माना जाता है. मान्यता है कि मृत व्यक्ति परमात्मा की शरण में जाता है, इसलिए शव यात्रा दिखना ईश्वर के आशीर्वाद के समान होता है और आपके कार्यों की सफलता का संकेत भी माना जाता है.
तीसरी बात
आपने अक्सर शव यात्रा में 'राम नाम सत्य है' का उद्घोष सुना होगा. मान्यता है कि अंत समय में यदि किसी के मुख से भगवान श्री राम का नाम निकलता है, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसलिए यदि आपको शव यात्रा दिखे, तो आप भी भगवान श्री राम का नाम लें, दो मिनट का मौन रखें और संभव हो तो पुष्प अर्पित करें. इससे मृत आत्मा को शांति मिलती है.
चौथी और अंतिम बात
अगर आपको किसी सुहागिन महिला की शव यात्रा दिखे, तो परंपरा के अनुसार सिंदूर का दान करना शुभ माना जाता है. शास्त्रों में कहा गया है कि पति के रहते स्त्री की मृत्यु होना एक विशेष स्थिति मानी जाती है. प्राचीन समय में स्त्रियां अपने पति से पहले मृत्यु की कामना भी करती थीं, ताकि उन्हें विधवा जीवन न जीना पड़े. हालांकि, समय के साथ कई पुरानी प्रथाएं, जैसे सती प्रथा, समाप्त हो चुकी हैं.