एक तरफ जहां चित्तौड़गढ़ के प्रसिद्ध कृष्ण धाम श्री सांवलिया जी मंदिर में इस साल 337 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड चढ़ावा आने के बाद मंदिर प्रशासन ने 16 गांवों को गोद लेकर विकास कार्य करवाने के बड़े-बड़े दावे किए हैं. वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इन तमाम दावों की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है. भीषण गर्मी के इस मौसम में मंदिर आए श्रद्धालुओं को आस्था के नाम पर जो भुगतना पड़ रहा है, उसने मंदिर प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
तपती धूप में भक्तों की अग्निपरीक्षा
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कॉरिडोर में प्रवेश करने से ठीक पहले ही श्रद्धालुओं के जूते-चप्पल बाहर खुलवा दिए गए. राजस्थान की इस झुलसा देने वाली भीषण गर्मी में मंदिर परिसर का फर्श कोयले की तरह तप रहा है. वीडियो के दृश्य विचलित करने वाले हैं. छोटे-छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग पैर जलने के कारण बेहाल हो रहे हैं.
दर्शन करने आए लोग इस तपन से बचने के लिए नंगे पैर ही अंधाधुंध दौड़ लगा रहे हैं. कुछ लोग छांव की तलाश में इधर-उधर दुबक रहे हैं तो कुछ लोग धधकते फर्श की तपन से बचने के लिए छांव की तलाश में दुकानों के नीचे शरण ढूंढ रहे हैं. कहीं-कहीं दरी पट्टी बिछी है. श्रद्धालु उसी ओर दौड़ लगाते दिख रहे हैं.
मंदिर में हर साल करोड़ों का चढ़ावा
मंदिर के पास करोड़ों रुपए का फंड मौजूद है. इसके बावजूद भीषण गर्मी में श्रद्धालुओं की ऐसी हालत हो रही है. यहां हर महीने लाखों-करोड़ों का दान गिनने के लिए 200 लोगों का स्टाफ लगाया जाता है. लेकिन मंदिर आने वाले इन भक्तों के पैरों को छाले पड़ने से बचाने के लिए प्रबंधन टाट-पट्टी, ग्रीन नेट या नियमित पानी के छिड़काव जैसी बुनियादी व्यवस्था तक नहीं कर पा रहा है.
ऐसे में सवाल उठता है कि जहां 180 कमरों की हाइटेक धर्मशाला और आधुनिक टॉयलेट कॉम्प्लेक्स बनाने के बड़े-बड़े प्लान चल रहे हैं. फिर इस भीषण गर्मी से निपटने के लिए कोई तात्कालिक इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
बता दें कि हाल ही में मंदिर की मुख्य कार्यपालक अधिकारी रहीं प्रभा गौतम का उदयपुर अतिरिक्त आबकारी आयुक्त पद पर तबादला हो गया है. सोमवार को उन्हें रिलीव भी कर दिया गया. ऐसे में उनके कार्यकाल के दौरान किए गए बड़े-बड़े दावों और व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति पर भी सवाल उठने लगे हैं. अब लोगों की नजर नए CEO पर है कि क्या वह श्रद्धालुओं की बुनियादी सुविधाओं और व्यवस्थाओं में कोई ठोस सुधार कर पाएंगे या नहीं.
सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन को जमकर आड़े हाथों ले रहे हैं. लोगों का कहना है कि जब मंदिर के पास अरबों का चढ़ावा आ रहा है तो भक्तों के लिए बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं हैं? गांवों को गोद लेना और बड़ी-बड़ी बातें करना तब तक बेकार है, जब तक मंदिर आए भक्तों का हाल ऐसा हो.
Input: Om Prakash