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Sakat Chauth 2026 Moonrise: दिल्ली-NCR-मुंबई, जानें आपके शहर में कितने बजे दिखेगा सकट चौथ का चांद

Sakat Chauth 2026: सकट चौथ का व्रत चंद्र दर्शन और अर्घ्य के बिना बिल्कुल अधूरा है. चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत संकल्प पूरा माना जाता है. आइए जानते हैं कि दिल्ली, यूपी और मुंबई सहित देश के सभी बड़े शहरों में आज चांद कितने बजे दिखाई देगा.

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Sakat Chauth के दिन लोगों को बड़ी बेसब्री से चांद निकलने का इंतजार रहता है. (Photo: Pixabay)
Sakat Chauth के दिन लोगों को बड़ी बेसब्री से चांद निकलने का इंतजार रहता है. (Photo: Pixabay)

आज देशभर में कई जगहों पर सकट चौथ का त्योहार मनाया जा रहा है. सकट चौथ का व्रत सनातन परंपरा में आस्था का प्रतीक है. इस दिन माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्ध की कामना के लिए निर्जला उपवास रखती हैं. इसे संकष्टी चौथ और तिल चौथ भी कहा जाता है. इस व्रत में चंद्रमा दर्शन का विशेष महत्व है. चंद्र के दर्शन और अर्घ्य के बिना यह व्रत अधूरा है. यही कारण है कि लोगों को बड़ी बेसब्री से चांद निकलने का इंतजार रहता है. आइए जानते हैं कि आपके शहर में सकट चौथ का चांद कितने बजे दिखाई देगा.

आपके शहर में कितने बजे दिखेगा चांद?

दिल्ली- रात 08.55 बजे
कोलकाता- रात 8.15 बजे
नोएडा- रात 08.54 बजे
लखनऊ- रात 08.41 बजे
गाजियाबाद-रात 8.54 बजे
आगरा- रात 8.53 बजे
मथुरा- रात 8.55 बजे
मेरठ- रात 8.52 बजे
जयपुर- रात 09.03 बजे
चंडीगढ़- रात 8.54 बजे
भोपाल- रात 09.20 बजे
इंदौर- रात 09.109 बजे
मुंबई- रात 09.24 बजे
बेंगलुरु- रात 09.10 बजे
पुणे- रात 09.20 बजे
नासिक- रात 09.18 बजे
हैदराबाद- रात 09.2 बजे
उज्जैन- रात 09.109 बजे
अहमदाबाह- रात 8.20 बजे
इंदौर- रात 09.7 बजे
चेन्नई- रात 8.509 बजे
पटना- रात 8.26 बजे
देहरादून- रात 8.48 बजे

सकट चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि
सकट चौथ की रात जब चंद्रमा आकाश में प्रकट हो जाए, तब एक लोटे में जल, थोड़ा कच्चा दूध और चीनी मिला लें. फिर चंद्रमा को देखते हुए भगवान गणेश और चंद्र देव का स्मरण करें  और श्रद्धा भाव से अर्घ्य दें. अर्घ्य देते हुए अपनी संतान के लिए मंगलकामनाएं भी करें. भगवान से उसकी रोग, भय और मानसिक पीड़ा से मुक्ति की प्रार्थना करें.

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सकट चौथ व्रत में चंद्रोदय का महत्व
सकट चौथ का महत्व अन्य व्रतों से बिल्कुल अलग है. इस दिन  चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा है. चंद्रमा को अर्घ्य देकर भगवान गणेश की पूजा के बाद ही कुछ ग्रहण किया जा सकता है. गणपति जी की पूजा के लिए भगवान गणेश को धूप, दीप, चंदन आदि अर्पित करें. इसके बाद उन्हें  गुड़ और तिल के लड्डू का भोग अर्पित करें, गणेश जी को मोदक अत्यंत प्रिय है तो आप यह भोग भी उन्हें चढ़ा सकते हैं. इसके बाद भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें. उनकी आरती करें. और अपने परिवार के लिए सुख-संपन्नता की प्रार्थना करें.

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