अगर आप अपने सपने पूरे नहीं करेंगे, तो कोई और आपको अपने सपने पूरे करने के लिए किराए पर रख लेगा- धीरूभाई अंबानी
धीरूभाई अंबानी का यह कथन आज के कॉर्पोरेट युग और करियर की दौड़ में सबसे बड़ी हकीकत को बयां करता है. साधारण शब्दों में कहें तो इसका सीधा मतलब है या तो आप अपने खुद के लक्ष्यों के लिए काम कीजिए, या फिर जिंदगी भर दूसरों के लक्ष्यों को पूरा करने का जरिया बने रहिए.
इस विचार की गहराई और इसका महत्व
नौकरी बनाम खुद का सपना: जब हम किसी संस्थान में नौकरी करते हैं, तो असल में हम वहां किसी और के बिजनेस विजन, उसकी कंपनी के मुनाफे और उसके सपनों को सच करने के लिए अपनी मेहनत और वक्त बेच रहे होते हैं. नौकरी करना गलत नहीं है, लेकिन अगर आपके अंदर खुद का कुछ करने का सपना है और आप डर की वजह से कदम नहीं बढ़ा रहे हैं, तो आप हमेशा दूसरों की तरक्की की सीढ़ी बनते रहेंगे.
आत्मनिर्भरता की सीख: यह विचार हमें मानसिक गुलामी और आरामदायक दायरे (Comfort Zone) से बाहर निकलने की प्रेरणा देता है. यह हमें याद दिलाता है कि हमारी काबिलियत, हमारी ऊर्जा और हमारे विचारों पर पहला हक हमारा खुद का होना चाहिए.
जोखिम लेने का हौसला: अपने सपनों को पूरा करने के लिए हिम्मत, अनुशासन और जोखिम लेने की जरूरत होती है. जब आप खुद के लिए रिस्क नहीं लेते, तो समाज की व्यवस्था आपको दूसरों के काम को आसान बनाने के लिए इस्तेमाल करने लगती है.
निष्कर्ष
जिंदगी में दो ही रास्ते हैं—या तो आप अपनी नाव के खुद कैप्टन बनिए और अपनी मंजिल तय कीजिए, या फिर किसी और के जहाज पर मजदूर बनकर उनके तय किए रास्ते पर चलते रहिए. फैसला आपका है कि आप अपनी काबिलियत की कीमत खुद तय करना चाहते हैं या किसी और को अपनी काबिलियत की कीमत लगाने का मौका देना चाहते हैं. अपने सपनों को पहचानिए और आज से ही उनके लिए काम करना शुरू कीजिए.