प्रयागराज में होने वाला माघ मेला हमेशा लोगों का ध्यान खींचता है. हर साल जनवरी-फरवरी में लगने वाले इस मेले को लघु कुंभ भी कहा जाता है, जिसमें पूरे देश के साधू-संत पहुंचते हैं. हर बार की तरह ये मेला इस बार भी सुर्खियों में है, लेकिन इस बार मेले का चर्चित विषय सिर्फ श्रद्धालु नहीं, बल्कि सतुआ बाबा की लग्जरी लाइफस्टाइल बन गई है. सोशल मीडिया पर उनकी लग्जरी गाड़ियां, आलीशान शिविर और भव्य लाइफस्टाइल की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं. उनकी ऐसी लाइफस्टाइल देखकर सभी लोग एक ही सवाल उठ रहा है कि कैसे कोई संत इतनी भव्यता और दिखावे भरी जिंदगी जी सकता है.
सोशल मीडिया पर होती चर्चा और उठते सवालों के बीच मौनी बाबा, बिना नाम लिए सतुआ बाबा की लग्जरी लाइफस्टाइल पर भड़के हैं. उन्होंने बयान देते हुए कहा कि संत समाज का असली स्वरूप त्याग, तपस्या, सेवा और संस्कार है, न कि वैभव, भव्यता और दिखावा. उनका कहना है कि संतों के आभूषण, महंगी गाड़ियां या आलीशान शिविर समाज के लिए हमेशा सवाल खड़े करेंगे.
मौनी बाबा ने समझाया धर्म का असली रूप
मौनी बाबा ने कहा, 'देखिए ये महाराज भारद्वाज की तपस्थली है और ये गंगा का पवित्र तीर्थ भी है. हमारे धर्म का असली स्वरूप त्याग, तप, अहिंसा, धर्म, सेवा, संस्कार और चरित्र है. यही हमारे धर्म का असली अलंकार है. वैभव, भव्यता, शक्ति या प्रदर्शन संत समाज का हिस्सा नहीं हो सकते. अगर संत समाज में ऐसे दिखावे होंगे तो समाज स्वाभाविक रूप से सवाल उठाएगा और उन सवालों को सुनना हमारी जिम्मेदारी है.'
जितना जरूरी उतने में जीवन जीना संत समाज का कर्त्वय
मौनी बाबा ने संत समाज के लोगों को चेतावनी दी कि जीवन में केवल उतना ही पर्याप्त है जितना जरूरी है. उन्होंने कहा कि भोजन करना जरूरी है, लेकिन रबड़ी जैसी भव्य चीजें खाना जरूरी नहीं है. कपड़ा पहनना जरूरी है, लेकिन मलमल या महंगे कपड़े पहनना जरूरी नहीं है. उनका कहना है कि जितने से जीवन चलता है, उतने में जीवन जीना चाहिए. बाकी लोगों की भावनाओं और समाज के नजरिए को समझना चाहिए. लोग जैसा कर्म करेंगे, समाज वैसा ही फैसला करेगा.
साधु और समाज का बदलता रूप
मौनी बाबा ने कहा कि अब का समय अर्थ युग है. अब समाज उन संतों को ज्यादा महत्व देता है जिनके पास दंभ, धन, भव्यता और सत्ता होती है. त्याग और तपस्या करने वालों को अब पहले जैसा महत्व नहीं मिलता. आज के लोग उन्हीं को साधु मानते हैं जिन्हें सत्ता मानती है, जिन्हें प्रशासन मानता है, जिन्हें नेता और अभिनेता महत्व देते हैं. जहां दंभ, पाखंड, धन और भव्यता है, वहीं आज पहचान और शासन है.
मौनी बाबा ने कहा कि अब साधु वो नहीं हैं जो रेती में लौटने वाला हो या धुनि पर रहने वाला साधु हो. अब साधु वो है जिसके आसपास सोने के आभूषण, लग्जरी गाड़ियां और बाकी सारी भव्यता हो. साधु अब वो नहीं जो पकुटी में रहता हो, बल्कि वो है जो ताजमहल जैसे बड़े होटल में रुकता है. अब साधु वो नहीं जो सूखी रोटी खाकर भजन करे और प्रार्थना करे. साधु वो है जो चौराहे पर जाम लगाए, धरना प्रदर्शन करे, गाली गलौज करे, नेतागिरी करे और नेताओं के साथ मेल-जोल बढ़ाए. ऐसे लोग ही आज समाज में सही साधु माने जा रहे हैं.
लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए चर्चा में हैं सतुआ बाबा
माघ मेले में सतुआ बाबा का भव्य पंडाल सोशल मीडिया से लेकर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. उनके पंडाल में कई सेलिब्रिटी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ खिंची गई तस्वीरें लगी हैं. बाबा की आलीशान लाइफस्टाइल, महंगी गाड़ियां और DM के रोटी बनाने तक की तस्वीरें सामने आ रही हैं.
सतुआ बाबा महंगी गाड़ियों के शौकीन माने जाते हैं. उनके कैंप में लैंड रोवर, डिफेंडर और तीन करोड़ की पोर्श कार दिखाई दी. इससे पहले भी उनकी तीन करोड़ की डिफेंडर कार चर्चा में रही थी. लगातार इतनी महंगी गाड़ियों के साथ उन्हें देखा जाना लोगों को चर्चा करने पर मजबूर कर रहा है. सतुआ बाबा रेबेन का चश्मा पहनते हैं. ये भी लोगों को चौंकाता है.