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'हम आपके धार्मिक स्थल नहीं तोड़ रहे लेकिन हमारे मंदिर...', धर्म संसद में संभल पर बोले स्वामी अवधेशानंद गिरि

महाकुंभ मेले की शुरुआत होने से तीन दिन पहले आजतक की धर्म संसद का आगाज हो चुका है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस धर्म संसद में शामिल हुए हैं. जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर, पीठाधीश्वर व आचार्य स्वामी अवधेशानंद गिरि भी धर्म संसद में शामिल हुए और कई मुद्दों पर अपने विचार रखे हैं.

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आचार्य स्वामी अवधेशानंद गिरि
आचार्य स्वामी अवधेशानंद गिरि

महाकुंभ मेले की शुरुआत होने से तीन दिन पहले आजतक की धर्म संसद का आगाज हो चुका है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस धर्म संसद में शामिल हुए हैं. सीएम योगी के साथ-साथ कई अन्य दिग्गज भी धर्म संसद में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं. जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर, पीठाधीश्वर व आचार्य स्वामी अवधेशानंद गिरि भी धर्म संसद में शामिल हुए और कई मुद्दों पर अपने विचार रखे.

जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर, पीठाधीश्वर व आचार्य स्वामी अवधेशानंद गिरि ने आजतक की धर्म संसद में कहा कि, कुंभ का अर्थ ही यह है कि जहां चारों ओर एकता देखने को मिले. कुंभ में सारे भेद मिट जाते हैं. सारी दूरियां सिमट जाती हैं. यहां की संप्रभुता देखी जा सकती है. कुंभ में आने वालों की कोई जाति नहीं है. 144 सालों के बाद एक बड़ा योग प्रकट हुआ है जिसमें कुंभ हो रहा है. कुंभ जैसा अलौकिक नजारा सिर्फ भारत में ही देखने को मिल सकता है.

जरूरी नहीं कि अमृत स्नान में ही डुबकी लगाई जाए
आचार्य स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि, जब से यहां अखाड़े और साधु आए हैं तबसे ही यूं तो यहां मांगलिक कार्य शुरू हो गए हैं. जरूरी नहीं कि अमृत स्नान में ही डुबकी लगाई जाए और मुख्य त्रिवेणी संगम पर ही आकर डुबकी लगाएं. लेकिन इसके आसपास भी आपने कहीं डुबकी लगाई तो भी बराबर ही पुण्य की प्राप्ति होगी. उन्होंने कहा कि संगम के पांच कोस में जहां स्थान मिले वहां डुबकी लगा लें, वहीं से मोक्ष और उद्धार की भावना पूर्ण हो जाएगी.

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सीएम योगी के महाकुंभ में कुछ नामों को बदलने पर क्या बोले आचार्य 
सीएम योगी ने हाल ही में कुंभ मेला से जुड़े कई पुराने नामों को बदलने का फैसला किया. सीएम योगी के इस एक्शन पर आचार्य ने कहा कि, पहले जिन नामों में विदेशी आक्रांताओं का प्रभाव नजर आता अब वह नाम स्वतंत्र हो गए हैं. पहले लोग शाही स्नान कहते थे जबकि शाही स्नान का अर्थ मुगल काल से जुड़ा हुआ था. मुगलों के लिए व्यवस्था में यह नाम रखा गया था. अब इसे बदलकर अमृत स्नान कर दिया गया है. हम कुंभ में अमृत स्नान करने आएं हैं, शाही स्नान नहीं.

6 साल पहले लगे अर्ध कुंभ और इस बार महाकुंभ में क्या अंतर है

पिछले कुंभ में संत- श्रद्धालु चाहते थे कि राम मंदिर जल्दी बने लेकिन इस बार मंदिर बनने का सपना पूरा हो चुका है. यहां तक कि देश से धारा 370 हट गई है और भी कई मुद्दे बीच में हैं तो इसलिए मैं ऐसा भी कह सकता हूं कि इस बार संत समाज ज्यादा उत्साहित है क्योंकि जो वह चाहते थे, वही हो रहा है. अब खास बात है कि इस कुंभ के जरिए सनातन को वैश्विक स्तर पर दिखाना. वेस्ट देशों ने संसार को हमेशा बाजार माना लेकिन हम अपना परिवार मानते हैं. पूरा विश्व एक कुटुंब है तो यह संदेश भारत से बाहर जाना चाहिए. 

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संभल की मस्जिद के विवाद पर क्या बोले अवधेशानंद गिरि महाराज 
आचार्य ने बिना किसी धर्म का नाम लिए बिना कहा कि उनकी किताब में भी लिखा है कि किसी की उपासना करने वाली जगह पर अतिक्रमण करने के बाद अगर प्रार्थना करते हैं तो वह स्वीकार नहीं होगी. आचार्य ने आगे कहा कि, जब उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, अरब देशों और अमेरिका में मंदिर है तो संभल में क्यों नहीं हो सकता है. 

आचार्य ने आगे कहा कि, ''हमने किसी के धार्मिक स्थल तोड़कर अपने मंदिर नहीं बनाए हैं. हमें अपने सारे धार्मिक स्थल वापस चाहिए और हम आदर के साथ कोर्ट के जरिए सब वापस लेंगे. जिस संप्रदाय की हम बात कर रहे हैं वह तलवार की नौंक पर फैला है. लेकिन हम शांति से बात करते आए हैं. यह बुद्ध की धरती है. संभल के मुस्लिम भाइयों से अपील है कि उदारता और बड़ा मन दिखाते हुए हमारे मंदिर हमको वापस लौटा दें. 

आरएसएस के चीफ मोहन भागवत के हालिया बयान पर कहा कि जो मंदिर दिख रहे हैं, वह तो कम से कम वापस आने चाहिए.  हम जबरन दूसरों के धार्मिक स्थल नहीं तोड़ रहे हैं लेकिन जहां हमारे भगवान हैं वह तो हमें वापस करें. बता दें कि मोहन भागवत ने कहा था कि हर जगह राम मंदिर जैसा मुद्दा नहीं बनाना चाहिए.  

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जातीय जनगणना पर भी बोले अवधेशानंद गिरि महाराज
 उन्होंने कहा कि, जातियां भारत का सौंदर्य है लेकिन अगर उन्हें राजनीति में लाया जाए तो उससे देश बंटने जैसी स्थिति हो जाएगी. जातियों में बंटने से पहले हम सनातनी हैं. पहले हिंदू हैं. जातिगणना के नाम पर कुछ लोग राजनीति कर रहे हैं सिर्फ. जातियां इस देश का ऐश्वर्य हैं और राजनेता जातियों को बांटकर हिंदू एकता को खंडित न करें. जो जाति के नाम पर देश को बांट रहे हैं, भगवान उन्हें सदबुद्धि दे. 

अवधेशानंद गिरि महाराज ने बताया 'डिजिटल कुंभ'
आचार्य ने कहा कि,  इस बार कुंभ पूरी तरह डिजिटल देख रहे हैं. घाट भी काफी सुंदर बनाए गए हैं. सोशल मीडिया की मदद से कुंभ का इस बार प्रचार भी वैश्विक स्तर पर है. मैं करीब 40 साल से कुंभ देख रहा हूं लेकिन इस बार कुंभ में सूचना की तकनीक का अद्भुत कौशल देखने को मिल रहा है. इस बार का कुंभ 'डिजिटल कुंभ' कहा जा सकता है. 

कुंभ में डुबकी लगाने के बाद यहां से क्या संदेश लेकर जाएं लोग?
आचार्य ने कहा कि, लोग पहले तो संकल्प लें कि प्लास्टिक मुक्त कुंभ हो. हरित कुंभ हो. साथ ही यहां से जाते समय अपने घर के आसपास पेड़ लगाने की सोच लेकर वापस जाएं. अपने यहां जाकर पेड़ लगाने का संकल्प लेकर जाएं. अपने घर और आसपास इलाके के लिए स्वच्छता का भी संदेश लेकर जाएं. साथ ही देश को सशक्त करने का संदेश भी यहां से लेकर जाएं.

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