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Garud Puran: मृत्यु के समय ये 4 चीजें मानी जाती हैं बेहद शुभ, आत्मा को मिलता है सुकून!

Garud Puran: गरुड़ पुराण में मृत्यु और उसके बाद की यात्रा से जुड़े कई महत्वपूर्ण रहस्य बताए गए हैं. इसमें बताया गया है कि अंतिम समय में तुलसी, गंगाजल, तिल और कुशा जैसी चीजें आत्मा के लिए शुभ मानी जाती हैं और उसे शांति व बेहतर मार्ग प्रदान करती हैं.

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मृत्यु के समय ये चीजें मानी जाती हैं जरूरी (Photo: ITG)
मृत्यु के समय ये चीजें मानी जाती हैं जरूरी (Photo: ITG)

Garud Puran: हिंदू धर्म में गरुड़ पुराण को बेहद महत्वपूर्ण और पवित्र ग्रंथ माना जाता है. यह केवल धार्मिक कथा नहीं है, बल्कि जीवन और मृत्यु से जुड़े गहरे सत्य को समझाने वाला ग्रंथ है. इसमें बताया गया है कि मनुष्य के कर्म ही उसके भविष्य और मृत्यु के बाद की स्थिति तय करते हैं. गरुड़ पुराण का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह व्यक्ति को अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देता है. इसमें स्वर्ग-नरक, पाप-पुण्य और आत्मा की यात्रा का विस्तार से वर्णन मिलता है, जिससे इंसान अपने जीवन को सही दिशा में ले जा सकता है.

इसके अलावा, इस ग्रंथ में मृत्यु के बाद होने वाले कर्मकांड और रीति-रिवाजों की भी जानकारी दी गई है. यही कारण है कि किसी के निधन के बाद घर में गरुड़ पुराण का पाठ किया जाता है, ताकि आत्मा की शांति के लिए मार्गदर्शन मिल सके. आइए जानते हैं कि गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के समय कौन-सी 4 चीजें आत्मा के लिए शुभ मानी गई हैं.

तुलसी के पत्ते

सनातन धर्म में तुलसी को देवी का स्वरूप माना गया है. मान्यता है कि जिस व्यक्ति के शरीर के पास या मुंह में तुलसी के पत्ते होते हैं, उसकी आत्मा को यमलोक नहीं जाना पड़ता. इसलिए परंपरा है कि मृत्यु के समय व्यक्ति को तुलसी के पौधे के पास लिटाया जाता है और उसके माथे या मुंह में तुलसी दल रखा जाता है.

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गंगाजल

मृत्यु के समय व्यक्ति के मुंह में गंगा का जल डालने की परंपरा बहुत पुरानी है. धार्मिक मान्यता के अनुसार गंगा भगवान विष्णु के चरणों से उत्पन्न हुई हैं और उनका जल पापों का नाश करता है. माना जाता है कि जो व्यक्ति गंगाजल ग्रहण करके प्राण त्यागता है, उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है.

तिल

तिल को भी बहुत पवित्र माना गया है. कहा जाता है कि तिल का संबंध भगवान विष्णु से है और इसका दान अत्यंत शुभ माना जाता है. मृत्यु के समय काले तिल को पास में रखना या तिल का दान करना नकारात्मक शक्तियों को दूर रखता है और आत्मा की यात्रा को आसान बनाता है.

कुशा घास

धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयोग होने वाली कुशा घास को भी पवित्र माना गया है. मान्यता है कि मृत्यु के समय व्यक्ति को कुशा की चटाई पर लिटाया जाए, तो यह आत्मा को शुद्ध और शांत मार्ग प्रदान करती है.

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