Basant Panchami 2026: हिंदू धर्म में हर तिथि और हर दिन का अपना अलग महत्व होता है. इन्हीं में माघ महीना विशेष स्थान रखता है, क्योंकि इस दौरान कई बड़े धार्मिक पर्व आते हैं. माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला बसंत पंचमी का पर्व भी इन्हीं में से एक है. इस साल बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को मनाया जाएगा. बसंत पंचमी को विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती को समर्पित माना जाता है.
मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती प्रकट हुई थीं, इसलिए यह पर्व शिक्षा और ज्ञान से जुड़े लोगों के लिए खास माना जाता है. छात्र, शिक्षक और कलाकार इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की पूजा करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं. शास्त्रों में बसंत पंचमी को लेकर कुछ जरूरी नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. तो आइए जानते हैं बसंत पंचमी की गलतियों के बारे में.
1. बसंत पंचमी के दिन प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने की सलाह दी गई है. बसंत पंचमी बसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है, इसलिए इस दिन पेड़-पौधों को काटना या उन्हें नुकसान पहुंचाना वर्जित माना गया है. मान्यता है कि ऐसा करने से मां सरस्वती अप्रसन्न हो सकती हैं.
2. इस दिन मन को शांत रखना बहुत जरूरी बताया गया है. क्रोध और अहंकार से दूरी बनानी चाहिए, क्योंकि शास्त्रों में इन्हें मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु कहा गया है. बसंत पंचमी के दिन संयम और विनम्रता अपनाने से मानसिक शांति मिलती है.
3. बसंत पंचमी के दिन तामसिक भोजन-मदिरा से परहेज करना चाहिए. इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करने और व्रत रखने से मां सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है. पूजा में एकाग्रता बनी रहती है.
4. बसंत पंचमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठना शुभ माना जाता है. उगते सूर्य को जल अर्पित करने के बाद पीले रंग के वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए. पीला रंग इस पर्व का प्रतीक माना जाता है.
5. बसंत पंचमी को नई शुरुआत के लिए भी अच्छा दिन माना गया है. इस दिन शिक्षा से जुड़े कार्य, वाहन या भूमि की खरीदारी, विवाह या अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत की जा सकती है.
6. यदि श्रद्धा और नियमों के साथ बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाए, तो बसंत पंचमी केवल एक त्योहार नहीं बल्कि जीवन में ज्ञान, शांति और सकारात्मकता लाने का माध्यम बन जाती है.