Athos Salome Predictions 2026: ईरान में भड़के विरोध प्रदर्शन और वेनेजुएला में आ रहा संकट जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से साल 2026 को लेकर सोशल मीडिया पर भविष्यवक्ताओं की भविष्यवाणियां सामने आ रही हैं. इसी तनावपूर्ण माहौल में एक बार फिर ब्राजील के भविष्यवक्ता एथोस सलोमी चर्चा में आ गए हैं, जिन्हें ''लीविंग नास्त्रेदमस'' कहा जाता है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही उनकी पुरानी भविष्यवाणियों को ईरान और वेनेजुएला के मौजूदा संकट से जोड़ा जा रहा है. अब लोगों के मन में यही सवाल उठ रहा है क्या यह महज संयोग है, या फिर सच में भविष्यवक्ता एथोस सलोमी की भविष्यवाणियां सच हो रही हैं.
लोगों के मुताबिक, एथोस सलोमी की 2025 और 2026 से जुड़ी कुछ पुरानी भविष्यवाणियां ईरान में मौजूदा हालात और वेनेजुएला में चल रहा राजनीतिक व आर्थिक संकट, दोनों ही बातों से मेल खाते हैं. एथोस सलोमे ने इन विरोध प्रदर्शनों का नाम लेकर कोई सीधे तौर पर भविष्यवाणी नहीं की थी, लेकिन उन्होंने ऐसे हालात का जिक्र जरूर किया था. उनके मुताबिक, दुनिया एक ऐसे युद्ध की तरफ बढ़ रहा है, जहां असली दबाव हथियारों से नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी और डिजिटली तरीके से बनाया जाएगा.
क्या लीविंग नास्त्रेदमस ने ईरान में होने वाले विरोध प्रदर्शन की करी थी भविष्यवाणी?
ब्राजील के भविष्यवक्ता एथोस सलोमी की 2025 और 2026 को लेकर की गई भविष्यवाणियां बहुत ही ज्यादा चर्चा में आ गई हैं. मिडिल ईस्ट को लेकर उनकी चेतावनियों में अक्सर टेक्नोलॉजी और बढ़ते तनाव की बात हुई. उन्होंने एक ऐसे संघर्ष की बात की जो ड्रोन और साइबर हमलों के द्वारा लड़ा जाएगा. आज जब ईरान में सरकार विरोध को रोकने के लिए इंटरनेट बंद कर रही है, तो कई लोग इसे सलोमी की उसी बात से जोड़ रहे हैं, जिसमें उन्होंने खामोश जंग यानी silent stage की शुरुआत का जिक्र किया था.
इसके अलावा नास्त्रेदमस की पंक्ति ''मधुमक्खियों का बड़ा झुंड'' को लेकर सलोमी की आधुनिक व्याख्या भी चर्चा में है. उनके मुताबिक इसका मतलब डिजिटल जन-आंदोलन से है यानी सोशल मीडिया के जरिए लोगों का एक साथ जुड़ना. मौजूदा प्रदर्शनों में, जहां इंटरनेट बंदी के बावजूद लोग ऑनलाइन माध्यमों पर निर्भर हैं, इसे उसी संकेत के रूप में देखा जा रहा है. सलोमी का ''अदृश्य जंग” पर जोर देना जिसमें साइबर हमले और EMP जैसी टेक्नोलॉजी शामिल है, जो कि प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच इंटरनेट को लेकर चल रहे इस टकराव से मेल खाता है.
क्यों सलोमी की भविष्यवाणी में हुआ था मिडिल ईस्ट का जिक्र?
सलोमी की भविष्यवाणियों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में चल रही अस्थिरता किसी अंत का संकेत नहीं है, बल्कि एक बड़े वैश्विक संघर्ष की शुरुआत है. उनके मुताबिक आने वाले इस साल में ईरान और इजराइल के बीच टकराव का तरीका बदल जाएगा और इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व ड्रोन जैसी टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा. इसके अलावा, सलोमी ने एक दावा यह भी किया था कि ईरान के किसी ठिकाने पर परमाणु अटैक हो सकता है, लेकिन अब तक इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है. कुछ लोग इसे आने वाले समय के लिए खतरनाक चेतावनी मानते हैं.
क्या इन भविष्यवाणियों का वेनेजुएला में चल रहे तनाव से है कोई संबंध?
जनवरी 2026 में जब वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिकी सेना द्वारा गिरफ्तारी की खबरें सामने आईं, तभी से सलोमी की भविष्यवाणियों ने रफ्तार पकड़ ली. उनके समर्थकों का मानना है कि यह घटना सलोमी की उस भविष्यवाणी से जुड़ती है, जिसमें उन्होंने कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप संसाधनों पर कब्जा करके चीन और रूस को चुनौती दे सकते हैं.
सलोमी का कहना था कि दुनिया धीरे-धीरे एक ऐसे दौर में जा रही है, जहां ताकत खुली राजनीति से नहीं, बल्कि दबाव डालकर कराए गए समझौतों और छिपी हुई आर्थिक व्यवस्थाओं के जरिए दिखाई देगी. वे इसे ''भू-राजनीतिक माफिया सिस्टम'' कहते थे. उनके मानने वालों को लगता है कि वेनेजुएला के तेल को लेकर चल रही रणनीति इसी सोच से मेल खाती है. सलोमी ने यह भी चेतावनी दी थी कि वेनेजुएला संकट का असर पूरे दक्षिण अमेरिका पर पड़ेगा. खास तौर पर उन्होंने कहा था कि बड़े पैमाने पर पलायन होगा, जिससे ब्राजील जैसे देशों पर गंभीर दबाव बन सकता है.
क्या सभी भविष्यवाणियां हो रही हैं सच?
भविष्यवाणियों को लेकर सदियों से सवाल उठते आ रहे हैं. नास्त्रेदमस की पुरानी कविताएं हों या सलोमी जैसे आधुनिक भविष्यवक्ताओं की बातें, इनकी बातें कभी कुछ सही से बयां नहीं करती हैं. इनके शब्द ऐसे होते हैं, जिनको बाद में किसी भी घटना के साथ जोड़ दिया जाता है. स्कॉलर भी यहीं कहते हैं कि इनकी बातों व कविताओं में ना तो किसी डेट व तारीख का जिक्र होता है और ना किसी नेता का जिक्र होता है. वहां सिर्फ संकेतों का इस्तेमाल होता है.