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कब है पौष पूर्णिमा व्रत? जानें इसका महत्व और पूजा विधि

हिन्दू ग्रन्थों में पौष पूर्णिमा के दिन दान, स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है.

पौष पूर्णिमा 2020 पौष पूर्णिमा 2020

हिन्दू धर्म में पूर्णिमा का बड़ा महत्व है. पूर्णिमा की तिथि चंद्रमा को प्रिय होती है और इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है. हिन्दू ग्रन्थों में पौष पूर्णिमा के दिन दान, स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है. पौष पूर्णिमा के दिन काशी, प्रयागराज और हरिद्वार में गंगा स्नान का बड़ा महत्व होता है. इस बार पौष पूर्णिमा व्रत 10 जनवरी को है.

पौष पूर्णिमा का महत्व

वैदिक ज्योतिष और हिन्दू धर्म से जुड़ी मान्यता के अनुसार पौष सूर्य देव का माह कहलाता है. कहा जाता है कि इस मास में सूर्य देव की आराधना से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसलिए पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है.

सूर्य और चंद्रमा का अद्भूत संगम पौष पूर्णिमा की तिथि को ही होता है. इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों के पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं.

पौष पूर्णिमा व्रत और पूजा विधि

- पौष पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल स्नान से पहले व्रत का संकल्प लें.

- पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें और स्नान से पूर्व वरुण देव को प्रणाम करें.

- स्नान के पश्चात सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए.

- स्नान से करने के बाद भगवान मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए.

- किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें.

- दान में तिल, गुड़, कंबल और ऊनी वस्त्र विशेष रूप से दें.

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