18 दिनों तक सवालों, शंकाओं और सोशल मीडिया पर उठती अटकलों के बीच घिरी साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की वजह सामने आ चुकी है. जोधपुर पुलिस की पड़ताल, पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि उनकी जान कार्डियक और पल्मोनरी अरेस्ट से गई. हालांकि जांच के दौरान इंजेक्शन लगाने वाले नर्सिंगकर्मी की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है, उसकी लापरवाही सामने आई है.
जोधपुर पुलिस कमिश्नर ओम प्रकाश पासवान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) रिपोर्ट और हिस्टोपैथोलॉजी जांच के आधार पर यह स्पष्ट हो गया है कि साध्वी की मौत किसी जहर, साजिश या बाहरी चोट के कारण नहीं हुई.
कमिश्नर ने कहा था कि मेडिकल रिपोर्ट में यह सामने आया है कि साध्वी लंबे समय से अस्थमा और फेफड़ों की बीमारी से जूझ रही थीं. इसी के चलते उन्हें कार्डियक और पल्मोनरी अरेस्ट आया, जो उनकी मौत की वजह बना. हालांकि, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिस नर्सिंगकर्मी ने उन्हें इंजेक्शन लगाया, उसमें लापरवाही बरती गई.

पुलिस के अनुसार, साध्वी को जो इंजेक्शन लगाए गए, वे शेड्यूल-एच कैटेगरी की दवाइयां थीं. ऐसी दवाइयों को बिना अधिकृत मेडिकल पर्ची के नहीं लगाया जा सकता. जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित नर्सिंगकर्मी देवी सिंह खुद इंजेक्शन लेकर आया था. अब तक उस इंजेक्शन से संबंधित वैध पर्ची पुलिस को नहीं मिली है. यही बिंदु जांच का अहम हिस्सा बना हुआ है.
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जब पुलिस कमिश्नर से पूछा गया कि क्या इंजेक्शन की वजह से कार्डियक अरेस्ट आया, तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में अंतिम फैसले के लिए मेडिकल बोर्ड के ओपिनियन का इंतजार है. हालांकि एफएसएल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साफ हो चुका है कि मौत विषाक्तता या किसी आपराधिक हमले का परिणाम नहीं थी. एक्सपर्ट ओपिनियन मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इंजेक्शन का प्रभाव किस हद तक जिम्मेदार था.
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था. एसआईटी ने अब तक 44 लोगों से पूछताछ की है. साथ ही 106 मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच की गई. 37 सैंपल को एफएसएल में जांच के लिए भेजा गया.

पुलिस का कहना है कि जांच गंभीरता से की गई, ताकि किसी भी तरह की साजिश या आपराधिक एंगल को नजरअंदाज न किया जाए.
जांच के दौरान साध्वी के पिता की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे. पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि पिता द्वारा मृत्यु के बाद लोगों को इकट्ठा करने के लिए किए गए फोन कॉल भावनात्मक स्थिति में किए गए थे. जांच में उनकी किसी प्रकार की आपराधिक संलिप्तता सामने नहीं आई है. उन्होंने यह भी बताया कि साध्वी के नाम से न्याय की मांग वाला जो मैसेज सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था, वह उनके पिता द्वारा ही लिखवाया गया था, ताकि लोगों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की सूचना दी जा सके.
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पुलिस ने यह भी साफ किया कि साध्वी द्वारा पूर्व में दर्ज कराए गए किसी अन्य मामले से जुड़े व्यक्तियों की इस मौत में कोई भूमिका सामने नहीं आई है. सभी संभावित एंगल की जांच के बाद फिलहाल मौत को प्राकृतिक कारणों से हुआ कार्डियक और पल्मोनरी अरेस्ट माना गया है.

हालांकि, नर्सिंगकर्मी की भूमिका को लेकर पुलिस ने कार्रवाई के विकल्प खुले रखे हैं. कमिश्नर पासवान ने कहा कि यदि विशेषज्ञ चिकित्सा रिपोर्ट में लापरवाही की पुष्टि होती है, तो सभी कानूनी विकल्प खुले हैं.
करीब ढाई सप्ताह तक यह मामला शहर और प्रदेश में चर्चा का विषय बना रहा. सोशल मीडिया पर तरह-तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं. पुलिस का दावा है कि वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की गई जांच ने अब स्थिति स्पष्ट कर दी है.
फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह बंद नहीं की गई है. विशेषज्ञों की अंतिम राय आने के बाद जरूरी कदम उठाए जाएंगे. लेकिन अब यह साफ हो चुका है कि साध्वी प्रेम बाईसा की मौत किसी साजिश का परिणाम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण ऐसा हुआ.