राजस्थान की बीजेपी सरकार ने प्रदेश में नया कानून लागू करने का फैसला किया है. कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि किया कि यह कदम विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए है, जहां जनसंख्या असंतुलन के कारण सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो रहा है.
इस कानून के लागू होने के बाद 'अशांत घोषित' क्षेत्रों में संपत्ति के लेन-देन के नियम पूरी तरह बदल जाएंगे. घोषित अशांत क्षेत्रों में कोई भी व्यक्ति अपनी अचल संपत्ति बिना जिला मजिस्ट्रेट यानी DM की लिखित अनुमति के नहीं बेच पाएगा.
DM यह सुनिश्चित करेंगे कि संपत्ति बेचने वाले पर कोई दबाव तो नहीं है और क्या उसे संपत्ति का उचित बाजार मूल्य मिल रहा है. कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर 3 से 5 साल की जेल की सजा हो सकती है. सरकार एक विशेष कमेटी बनाएगी जो उन इलाकों को 'अशांत क्षेत्र' चिन्हित करेगी, जहां सांप्रदायिक तनाव या जनसंख्या असंतुलन की समस्या है.
सरकार के तर्क: क्यों जरूरी है यह बिल?
सरकार ने इस बिल के पीछे तीन प्रमुख आधार बताए हैं. हिंदुओं या अल्पसंख्यक (इलाके के हिसाब से) आबादी को अपनी संपत्ति औने-पौने दामों में बेचने और पलायन करने से रोकना.
वहीं, विशेष समुदायों की आबादी में अचानक और अत्यधिक वृद्धि वाले क्षेत्रों में सामाजिक संतुलन बनाए रखना. उन इलाकों में सांप्रदायिक तनाव को कम करना जहां जमीन और मकानों को लेकर अक्सर विवाद होता है.
भजनलाल सरकार के इस फैसले को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है. सरकार का मानना है कि इससे सीमावर्ती जिलों और जयपुर के पुराने शहर जैसे इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षा मिलेगी, वहीं विपक्ष इस पर ध्रुवीकरण के आरोप लगा सकता है.