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13 साल में दो बार शिलान्यास, 37 से बढ़कर ₹79000 करोड़ हुई लागत... पचपदरा रिफाइनरी की कहानी

राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी उद्घाटन से पहले लगी आग के कारण एक बार फिर सुर्खियों में है. 13 साल में लागत 37 हजार करोड़ से बढ़कर 79 हजार करोड़ पहुंचने के बीच यह परियोजना लगातार राजनीतिक खींचतान का शिकार रही. अब रिफाइनरी की CDU यूनिट में आग लगने से इसका उद्घाटन फिर टल गया है.

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राजस्थान के बालोतरा स्थित एचपीसीएल की रिफाइनरी में आग लग गई, जिसका पीएम मोदी 21 अप्रैल को उद्घाटन करने वाले थे. (Photo: PTI)
राजस्थान के बालोतरा स्थित एचपीसीएल की रिफाइनरी में आग लग गई, जिसका पीएम मोदी 21 अप्रैल को उद्घाटन करने वाले थे. (Photo: PTI)

राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा में स्थित रिफाइनरी एक बार फिर चर्चा में है, इस बार उद्घाटन से ठीक पहले लगी आग और वर्षों से चली आ रही राजनीतिक खींचतान के कारण. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन करने वाले थे, लेकिन उससे करीब 20 घंटे पहले ही रिफाइनरी की क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में भीषण आग लग गई, जिसके चलते कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा.

यह परियोजना 13 साल पहले 2013 में शुरू हुई थी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के साथ समझौता (MoU) किया था. उस समय इसकी अनुमानित लागत करीब 37,230 करोड़ रुपये थी और इसका शिलान्यास सोनिया गांधी के हाथों हुआ था. हालांकि, 2013 में सरकार बदलने के बाद वसुंधरा राजे सिंधिया के नेतृत्व वाली नई बीजेपी सरकार ने इस समझौते की समीक्षा शुरू की, जिसे घाटे का सौदा बताया गया. 

इससे परियोजना की गति धीमी पड़ गई और कई वर्षों तक काम ठप सा रहा. बाद में संशोधित शर्तों के साथ 2018 में प्रधानमंत्री मोदी ने दोबारा इसका शिलान्यास किया, लेकिन तब तक लागत बढ़कर करीब 43,000 करोड़ रुपये हो चुकी थी. इसके बाद भी राजनीतिक बदलाव जारी रहे. 2018 में फिर अशोक गहलोत की सरकार आई और उन्होंने बीजेपी पर परियोजना में देरी के आरोप लगाए. 2023 में फिर बीजेपी सत्ता में लौटी और भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री बने. तब तक इस रिफाइनरी की लागत बढ़कर करीब 79,000 करोड़ रुपये पहुंच चुकी थी, यानी 13 वर्षों में लगभग दोगुनी.

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यह भी पढ़ें: साजिश या हादसा? अमेरिका-ईरान जंग के बीच भारत समेत 5 देशों की रिफाइनरी में कैसे लगी आग

आग लगने के पीछे आखिर क्या रही वजह?

राजनीतिक खींचतान, बार-बार बदले गए एग्रीमेंट, डिजाइन में बदलाव के कारण परियोजना की गति धीमी रही, जिससे लागत लगातार बढ़ती गई. उद्घाटन से ठीक पहले लगी आग ने इस परियोजना पर एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. HPCL के मुताबिक, शुरुआती जांच में पाया गया कि हीट एक्सचेंजर सर्किट के किसी वाल्व या फ्लैंज से हाइड्रोकार्बन का रिसाव हुआ, जिससे CDU (क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट) में आग लगी. यह यूनिट रिफाइनरी का हार्ट मानी जाती है, जहां कच्चे तेल को प्रोसेस किया जाता है.

हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया कि आग केवल हीट एक्सचेंजर क्षेत्र तक सीमित रही और एहतियात के तौर पर CDU और VDU सहित सभी यूनिट्स को तुरंत अलग कर दिया गया. संरचनात्मक रूप से किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है और आग को करीब 1 घंटा 45 मिनट में काबू कर लिया गया. घटना के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जांच के आदेश दिए हैं. साथ ही, आंतरिक और बाहरी विशेषज्ञों की टीमें आग के कारणों और संभावित नुकसान का आकलन कर रही हैं.

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समय के साथ लागत में हो सकता है इजाफा

इस रिफाइनरी की क्षमता 9 मिलियन टन सालाना है और इसके शुरू होने से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके बनने की उम्मीद थी. लेकिन आग की इस घटना के बाद लोगों की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है. रिफाइनरी की मरम्मत में 1 से 6 महीने तक का समय लग सकता है, जिससे लागत में और बढ़ोतरी की आशंका है. पचपदरा रिफाइनरी अब सिर्फ एक इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी चुनौतियों का प्रतीक बन गई है.

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