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कौन हैं 6 साल की कथावाचक कृष्णा किशोरी, जिन्हें सुनने उमड़ रही भीड़! राधा-कृष्ण को मानती हैं मामा-मामी

Rajasthan News: फतेहपुर (Fatehpur) की कृष्णा किशोरी (Krishna Kishori) श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर में कथा का वाचन कर रही हैं. छह साल की कृष्णा किशोरी राधा और कृष्ण को मामा-मामी मानती हैं. छह साल की बच्ची की कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. लोगों के लिए एलईडी स्क्रीन लगा दी गईं. कृष्णा पहली बार व्यास पीठ पर विराजमान होकर कथा सुना रही हैं.

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व्यासपीठ पर छह साल की कथावाचक कृष्णा किशोरी.
व्यासपीठ पर छह साल की कथावाचक कृष्णा किशोरी.

राजस्थान के फतेहपुर (Fatehpur) में इन दिनों नानी बाई के मायरे की कथा सुर्खियों में है. यहां छह साल की कथावाचक कृष्णा किशोरी (Krishna Kishori) को सुनने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. कृष्णा किशोरी जिस मासूमियत के साथ कथा का मर्म समझाती हैं, वह लोगों को मुग्ध कर देता है. बालपन का भोला लहजा और भाव में डूबे भक्ति गीत सुनने वालों को झूमने पर मजबूर कर रहे हैं.

बता दें कि यूकेजी में पढ़ने वाली फतेहपुर की कृष्णा किशोरी राधा-कृष्ण को मामा-मामी मानती हैं. वे यहां नगर सेठ श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर में कथा का वाचन कर रही हैं. कृष्णा किशोरी पहली बार व्यास पीठ पर विराजमान हुई हैं. कृष्णा किशोरी ने लगातार तीन घंटे तक बिना देखे कथा का वाचन किया. कथा में जो भी चढ़ावा आता है, उसे कृष्णा किशोरी मंदिर में दान कर देती हैं.

यहां देखें Video

वृंदावन में राधा-कृष्ण को देख बोलीं-ये मेरे मामा-मामी

कृष्णा किशोरी (Krishna Kishori) के पिता महेश व्यास ने बताया कि चार भाई-बहनों में सबसे छोटी कृष्णा किशोरी है. उसे वृंदावन जाने का बहुत चाव है. जब उसे पहली बार लेकर गए तो उसने राधा-कृष्ण की मूर्ति देख उन्हें मामा व मामी कहकर संबोधित किया. तब से अब तक वह उन्हें इसी नाम से पुकारती है.

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खुद सुनाया भजन तो हैरत में पड़ा परिवार

कथा की प्रेरणा के बारे में कृष्णा के पिता ने बताया कि राजस्थानी फिल्म सुपातर बीनणी के लेखक उनके पिता बनवारीलाल व्यास ने नानी बाई का मायरा अपनी शैली में लिखा था. करीब तीन महीने पहले वह उसे गा रहे थे तो उनके पास बैठी कृष्णा ने भी गाना शुरू कर दिया. इसके बाद उन्होंने हारमोनियम पर उसे अभ्यास शुरू करवाया. परिवार का कहना है कि कृष्णा भविष्य में भागवत कथा का वाचन कर मानव कल्याण करे.

दादा की रिकॉर्डिंग सुन 20 दिन में सीखी कथा

कृष्णा ने नानी बाई के मायरे की कथा अपने दादा बनवारीलाल व्यास की रिकॉर्डिंग सुनकर सीखी है. वे लेखक और कथावाचक थे. उनकी कथाओं की रिकॉर्डिंग परिवार ने सहेज कर रखी है. कृष्णा के जन्म से 13 साल पहले दादा बनवारीलाल का निधन हो गया था. कृष्णा के पिता ने बताया कि महज 20 दिन में कृष्णा ने पूरी कथा और भजन याद कर लिए.

मोबाइल, कार्टून और फास्ट फूड से दूरी, भोग लगाकर खाती है खाना

कृष्णा की दिनचर्या सात्विक है. वह अन्य बच्चों से अलग हटकर है. मां विजयश्री ने बताया कि कृष्णा मोबाइल, कार्टून, सीरियल व फास्ट फूड से दूर रहती है. टीवी पर केवल वह महादेव सीरियल ही देखती है. सुबह पांच बजे उठकर सूर्य को अर्घ्य देने और भगवान को भोग लगाने के बाद ही वह कुछ खाती है. बच्ची के माता-पिता स्कूल के संचालक है. कृष्णा किशोरी यूकेजी में पढ़ रही है.

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