scorecardresearch
 

1 मंच, 3 धर्म और 66 जोड़े... धौलपुर के सामूहिक विवाह में गरीब-अनाथ बेटियों की धूमधाम से हुई शादी

धौलपुर में तीर्थराज मुचकुंद नगरी में सर्वधर्म सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदाय के 66 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया. इनमें 44 अनाथ और गरीब कन्याएं शामिल थीं. समाजसेवी अनिल अग्रवाल द्वारा आयोजित इस समारोह में विभिन्न धर्मों की रस्मों से शादियां कराई गईं और नवविवाहित जोड़ों को घरेलू सामान भी भेंट किया गया.

Advertisement
X
धौलपुर में अनूठा आयोजन.(Photo: Umesh Mishra/ITG)
धौलपुर में अनूठा आयोजन.(Photo: Umesh Mishra/ITG)

राजस्थान के धौलपुर जिले की तीर्थराज मुचकुन्द नगरी में बुधवार को कौमी एकता की अनूठी मिसाल देखने को मिली. यहां आयोजित सर्वधर्म सामूहिक विवाह सम्मेलन में हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदाय की 66 गरीब और अनाथ कन्याओं का विवाह संपन्न कराया गया. ये वे जोड़े थे जो आर्थिक तंगी के कारण शादी नहीं कर पा रहे थे. 

दरअसल, इस आयोजन ने उन युवतियों के सपनों को साकार कर दिया, जिन्होंने शायद कभी सोचा भी नहीं था कि उनकी शादी भी धूमधाम से होगी और उनका घर बसेगा. बैंड-बाजों की धुन के बीच तीर्थराज मुचकुन्द सरोवर के पास आयोजित इस समारोह में सभी जोड़ों को एक ही मंच के नीचे विवाह बंधन में बांधा गया. समारोह में शामिल अधिकांश कन्याएं बेहद गरीब परिवारों से थीं. इनमें 44 ऐसी कन्याएं भी थीं जिनके माता-पिता और भाई नहीं हैं.

यह भी पढ़ें: धौलपुर पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला, दोषी को सुनाई ताउम्र कैद की सख्त सजा

तीनों धर्मों के रीति-रिवाजों से हुआ विवाह

जिले के प्रमुख समाजसेवी अनिल अग्रवाल द्वारा आयोजित इस विवाह सम्मेलन की खास बात यह रही कि एक ही मंडप के नीचे हिंदू, मुस्लिम और सिख धर्म के अनुसार विवाह की रस्में पूरी कराई गईं. इस सर्वधर्म विवाह सम्मेलन में 47 जोड़े हिंदू समाज के विभिन्न जातियों से थे, जबकि 9 जोड़े मुस्लिम समुदाय और 10 जोड़े सिख समुदाय से थे.

Advertisement

इस आयोजन ने न केवल कौमी एकता की मिसाल पेश की बल्कि उन युवाओं के सपनों को भी साकार कर दिया जो आर्थिक अभाव के कारण जीवनसाथी की तलाश भी नहीं कर पा रहे थे. सामूहिक विवाह समारोह में शामिल कई युवतियां धौलपुर के डांग क्षेत्र से थीं.

धौलपुर

कई राज्यों और जिलों से आईं अनाथ और गरीब कन्याएं

इस सामूहिक विवाह समारोह में मध्य प्रदेश, करौली, मण्डरायल, श्योपुर, शिवपुरी, मासलपुर, कैलादेवी और धौलपुर सहित दर्जनभर जिलों और गांवों की युवतियां शामिल हुईं. इनमें 44 कन्याएं अनाथ थीं. इन सभी जोड़ों का विवाह पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ धूमधाम से संपन्न कराया गया.

समारोह के दौरान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार, मौलवी द्वारा निकाह की रस्म और सिख धर्म के अनुसार विवाह की परंपराएं निभाई गईं. धर्म और मजहब की सीमाओं से परे यह आयोजन मानवता और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया.

धौलपुर

समाजसेवी अनिल अग्रवाल ने कराया आयोजन

इस आयोजन का श्रेय धौलपुर के समाजसेवी अनिल अग्रवाल को जाता है. उन्होंने बताया कि उनका परिवार लंबे समय से समाज सेवा से जुड़ा रहा है. उन्होंने कहा कि पहले उनका परिवार भी आर्थिक रूप से कमजोर था और उन्होंने बेटियों की शादी से जुड़ी परेशानियों को करीब से महसूस किया है.

सर्राफा व्यापारी अनिल अग्रवाल के अनुसार, वे धौलपुर जिले के खासकर डांग क्षेत्र में गरीब और अनाथ बेटियों को तलाशकर उनके रिश्ते तय करवाते हैं. इसके बाद सामूहिक विवाह सम्मेलन के माध्यम से उनकी शादी कराई जाती है.

Advertisement

धौलपुर

अब तक 577 युवतियों की करा चुके हैं शादी

अनिल अग्रवाल ने बताया कि वे राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के दो दर्जन से अधिक जिलों की करीब 511 युवतियों का विवाह पहले ही करा चुके हैं. बुधवार को आयोजित इस आठवें सामूहिक विवाह सम्मेलन में 66 जोड़ों की शादी कराई गई, जिसके बाद कुल 577 युवतियों के विवाह का आयोजन उनके द्वारा कराया जा चुका है.

उन्होंने यह भी बताया कि उनका परिवार होली, दिवाली, जन्मदिन या निजी समारोहों पर खर्च करने के बजाय समाज की गरीब और अनाथ बेटियों की शादी में सहयोग करता है. विवाह के बाद नवविवाहित जोड़ों को टीवी, फ्रिज, बेड सहित घरेलू सामान भी उपहार में दिया गया और भावभीनी विदाई दी गई. यह आयोजन ईश्वर-अल्लाह और राम-रहीम की संस्कृति के संगम के रूप में कौमी एकता और सामाजिक सेवा की प्रेरणादायक मिसाल बन गया.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement