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विशेष: चुनाव लड़ते हैं तो हीरो, संसद में जाते हैं तो जीरो

चुनाव लड़ने के लिए इस वक्त फिल्मी सितारों के अच्छे दिन आ गए हैं. बीजेपी में हेमा मालिनी पहले से थीं. अब जया प्रदा भी आ गईं. इतना कम था जो भोजपुरी एक्टर रविकिशन और भोजपुरी गायक निरहुआ के भी बीजेपी से चुनाव लड़ने की बात आ गई, तो इसके जवाब में कांग्रेस ने उतारा दिया ग्लैमरस और बिंदास हीरोइन उर्मिला मातोंडकर को. फिल्मी सितारे जब चुनावी मैदान में उतरते हैं तो उनका करिश्मा ऐसा होता है कि वो बंपर वोटों से जीत जाते हैं. लेकिन जब संसद में पहुंचते हैं तो बहस में हिस्सा लेना और सवाल उठाना तो छोड़िए, हाजिरी में भी पीछे छूट जाते हैं. तो क्या फिल्मी सितारे सिर्फ पार्टियों की शोभा बढ़ाने और वोट बटोरने-जीतने का जरिया भर होते हैं?

Today in Vishesh we will talk about the entry of stars of entertainment field in politics. On Tuesday, Jaya Prada joined the BJP party, and on Wednesday, Chamma Chamma girl Urmila Matondkar joined the Congress party. As if this was not enough, the news of Bhojpuri stars, Nirahua and Ravi Kishan joining the BJP, also came into light. When the film stars enter into politics, they claim victory by heavy votes, but, when it comes to have attendance in the Parliament, they lack by heavy percentage. Under such situation, the question arises- Are filmy stars only for gracing the political parties, and for attracting votes? Watch video.

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