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विशेष: ....जब खतरे में पड़ गया था लोकतंत्र

राष्ट्रपति भवन हिंदुस्तान की आजाद खयाली का, आजादपरस्ती का, जम्हुरियत की बुलंदी का, आखिरी आदमी की अहमियत की पहचान है. लेकिन इसी राष्ट्रपति भवन से 43 साल पहले आधी रात को एक फैसला निकला था और उस फैसले ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को हिलाकर रख दिया था. देश में 25-26 जून 1975 की देर रात को इमरजेंसी लग गई थी.

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