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इंदिरा गांधी को था अपनी हत्‍या का एहसास

इंदिरा गांधी को था अपनी हत्‍या का एहसास

इंसान मरता है लेकिन शख्सियतें ज़िंदा रहती है. ज़िंदगी खत्म होती है लेकिन सोच कभी ख़त्म नहीं होती. 31 अक्टूबर 1984 इतिहास की ये वो काली तारीख है जिस दिन देश की ताकतवर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी शहीद हो गईं लेकिन इंदिरा गांधी के साथ ना जाने क्या था, वो अक्सर अपनी मौत का ज़िक्र करती रहती थीं. क्या किसी को मौत का एहसास उसे जीते जी हो सकता है.

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