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वारदात: देश के 3 शेल्टर होम का शर्मनाक सच

जहां अंदर कहीं नाइंसाफी हो रही हो वहां बाहर खामोश रहना गुनाह है, ये हम नहीं कह रहे हैं. यह तो गुरू रवीन्द्र नाथ टैगोर करीब नब्बे साल पहले हमसे कह गए थे. शायद हम ही बहरे थे और हम सिर्फ बहरे नहीं अंधे भी हैं क्योंकि हमें अपने शहरों में चलने वाले सफेद पोश चकला घर भी नहीं दिखाई देते. अगर दिखाई देता, तो मुजफ्फरपुर, देवरिया और हरदोई ना हुआ होता. देखें- 'वारदात' का ये पूरा वीडियो.

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