मार्कण्डेय ऋषि के तप से जब बंद हो गयी सरयू की धारा, तब सामने आए देवों के देव महादेव फिर उन्होंने धरा एक ऐसा रूप जिसके आगे झुक गए ऋषि और मुक्त हो गय़ी सरयू की धारा.