औघड़दानी हैं महादेव, भोले हैं महादेव, देवों के देव हैं महादेव. तभी तो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को जब छोड़ना पड़ा अयोध्या तो उन्होंने शिवलिंग में अपना अंश स्थापित किया. उसके बाद ही राज्य के बाहर कदम बढ़ाया.