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...तो बदला नहीं है 'मदर इंडिया" का सच !

...तो बदला नहीं है 'मदर इंडिया" का सच !

सिल्वर स्क्रिन पर तो मदर इंडिया 1957 में आई लेकिन 60 बरस बाद भी मदर इंडिया उसी त्रासदी से जुझ रही है जिसे महबूब खान ने 60 बरस पहले सुनहरे पर्दे पर उकेरा. सिल्वर स्किरन पर मदर इंडिया के सच को देखकर दुनिया के कई देशों के फिल्मकारों ने तब नेहरू को खत लिखकर जानना चाहा था कि क्या वाकई भारत में मदर इंडिया की ये त्रासदी है या फिर ये महज सिनेमा है.60 बरस बाद जब हमारे सतारा के संवाददाता इम्तियाज ने जावली तालुक के भोगावाली गांव में खेत में बैल की जगह महिलाओं को ही जुतते हुए देखा तो उन्होंने उस सच को कैमरे के जरीये सामने रख दिया जिसे देखकर सरकारें तो आंख मूद लेना ही बेहतर समझती हैं.

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