बीजेपी सत्ता में आने से पहले जीएम बीज के संवर्धन का विरोध करती आई है. किसानों के हित और पर्यावरण का हवाले देते हुए उपभोक्ताओं पर जैविक प्रभाव का आकलन करे बिना जीएम बीज को इजाजत न देने का वादा 2009 के घोषणा पत्र में किया गया था. बीटी फसलों का विरोध करने वाली बीजेपी ने 2014 में आठ राज्यों में इसका ट्रायल शुरू कर दिया.हालत ये है कि दिल्ली में पर्यावरण मंत्रालय के सामने किसान और पर्यावरणविद् विरोध कर रहे हैं. सरकार की ओर से सरसों की जीएम फसल के व्यवसायिक इस्तेमाल की मंजूरी पर किसानों ने मंत्रालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया. उनका कहना है कि इससे किसानों के ऊपर भार पड़ेगा और वो फसलों पर ज्यादा से ज्यादा केमिकल डालेंगे जिससे सीधे तौर पर सेहत और जमीन दोनों को नुकसान होगा.