चुनाव का शोर ही भारत में लोकतंत्र की तस्दीक करता है. यानी एक तरफ हर नागरिक के लिए एक वोट, तो दूसरी तरफ वोट के लिए राजनीतिक दलों की रैली और हंगामा. लोकतंत्र के इस अंदाज में करोड़ों रुपये प्रचार में बहा दिए जाते हैं. राजनीतिक दलों को करोड़ों रुपये कौन देता है? करोड़ों रुपये के एवज में दान देने वाले को क्या मिलता है? इस सवाल पर हमेशा खामोशी बरती गई.