कोरोना की दूसरी लहर में जब हालात बद से बदतर हो रहे हैं, तो सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खुल रही है. आम जनता की कौन कहे, अब सरकार के मंत्री तक सवाल उठाने लगे हैं. यूपी के कानून मंत्री बृजेश पाठक की अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को लिखी चिट्ठी सामने आई है, जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि लोगों को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं. ना एंबुलेंस समय पर मिलती है, और भर्ती होने में 2-2 दिन का समय लग रहा है. जांच पर भी उन्होंने सवाल उठाया है. यूपी के मंत्री की चिट्ठी के ठीक एक दिन पहले गुजरात हाई कोर्ट ने भी वहां की सरकार के लिए टिप्पणी की थी कि लोगों का भरोसा उठ रहा है, लोगों को लगने लगा है कि अब वो भगवान भरोसे हैं. सवाल उठ रहा है कि ये नौबत क्यों आई? क्या सरकारें कोरोना के मामले घटने के बाद बेफिक्र हो गई थीं? क्या बीते 1 साल में स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के दावे हवा-हवाई हैं? क्या कोविड काल में मैनेजमेंट सरकारी व्यवस्था के बूते की बात नहीं रह गई है? यूपी के मंत्री ने अपनी चिट्ठी में क्या कुछ कहा है, और क्यों इस चिट्ठी के बाद विपक्ष को मौका हाथ लगा है? देखें दंगल, रोहित सरदाना के साथ.
The coronavirus crisis is unveiling the reality of the Indian Health system. Not only common man but Cabinet Ministers are also raising questions over poor health management. UP’s minister Brajesh Pathak has written to the state’s top bureaucrats about poor management. He also mentioned that people are not getting an ambulance on time, patients have to wait for days to get admitted to hospitals. Now the question is why the government did not work to uplift the health care system even after one year into the pandemic. Watch this episode of Dangal.