77वें गणतंत्र दिवस पर भारत के संविधान की ताकत और उसकी जड़ों का जश्न मनाया गया. प्रस्तावना ‘हम भारत के लोग’ से शुरू होती है, जो जनता को सर्वोपरि मानती है. संविधान सभा में ईश्वर और गांधीजी का नाम जोड़ने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया था ताकि संविधान केवल जनता के नाम पर हो. यही वजह है कि भारत का संविधान कभी खतरे में नहीं आ सकता. पाकिस्तान ने धर्म के नाम पर संविधान बनाया और बार-बार बदला, जबकि भारत ने जनता को सर्वोच्च मानकर लोकतंत्र की नींव रखी.