बुधवार को मुंबई में दशहरा रैली को शिवसेना की लड़ाई का हथियार बनाया गया. शिवसेना के इतिहास में कल पहली बार मुंबई में दो-दो दशहरा रैलियां हुईं. जब देश रावण दहन कर रहा था तब शिवसेना के दो गुट आपस में लड़ रहे थे. एक दूसरे को रावण, कटप्पा, गद्दार कह रहे थे. आखिर क्यों बाला साहेब ठाकरे की शिवसेना इस मोड़ तक पहुंच गई? और क्या शिंदे का सत्ता रथ, उद्धव के लिए सबसे बड़ा अग्निपथ बन गया है?