दिमागी रूप से बीमार होना मजाक नहीं है. ये सबसे तकलीफदेह चीज है. अगर आपको शारीरिक बीमारी है, तो आपके लिए हर किसी में करुणा होती है, लेकिन अगर आपको मानसिक बीमारी है, तो दुर्भाग्य से आपकी हंसी उड़ती है. ऐसा इसलिए है क्योंकि यह अंतर करना कठिन है कि कब कोई व्यक्ति बीमार है और कब कोई मूर्खता कर रहा है. उन लोगों के लिए यह सबसे बड़ी समस्या है जिनके परिवार में कोई मानसिक रूप से विचलित है. आप नहीं जानते कि वो नाटक कर रहे हैं या वाकई तकलीफ में हैं. आप नहीं जानते कि कब करुणा रखें, और कब उनके प्रति कठोर रुख अपनाएं.
मानवीय विवेक एक बहुत नाजुक चीज है. समझदारी और पागलपन के बीच की रेखा बहुत बारीक है. अगर आप उसे हर दिन धकेलते हैं, तो आप उसे पार कर जाएंगे. जब आप गुस्सा होते हैं, तो उसके लिए क्या अभिव्यक्ति इस्तेमाल होती है? ‘मैं आप पर पागल (मैड) हूं,’ या ‘अभी मैं पागल हूं.’ आप पागलपन का थोड़ा बहुत मजा ले सकते हैं - आपने सीमा पार की, और ये एक किस्म की आजादी या ताकत जैसी महसूस हुई. लेकिन एक दिन जब आप वापस नहीं लौट पाते, तभी पीड़ा शुरू होती है. ये शारीरिक कष्ट जैसी नहीं है - यह जबरदस्त पीड़ा होती है. मैं उन लोगों के आसपास रहा हूं जो मानसिक बीमार थे, उनकी मदद करने की कोशिश कर रहा था. किसी को भी ऐसा नहीं होना चाहिए. लेकिन दुर्भाग्य से, यह दुनिया में एक महामारी बनती जा रही है.
केमिस्ट्री का ऑर्केस्ट्रा
मुख्यतया, एक स्तर पर स्वास्थ्य का मतलब प्रसन्नता होती है. अगर आपका शरीर सुखद बन जाता है, तो हम इसे स्वास्थ्य कहते हैं. अगर यह बहुत सुखद बन जाता है, तो हम इसे सुख कहते हैं. अगर आपका मन सुखद बन जाता है, तो हम शांति कहते हैं. अगर वह बहुत सुखद बन जाता है तो हम उसे खुशी कहते हैं. अगर आपकी भावनाएं सुखद बन जाती हैं तो हम उसे प्रेम कहते हैं. अगर वो बहुत सुखद बन जाती हैं तो हम उसे करुणा कहते हैं. अगर आपकी ऊर्जाएं सुखद बन जाती हैं तो हम उसे आनंद कहते हैं. अगर वो बहुत सुखद बन जाती हैं तो हम उसे परमानंद कहते हैं. अगर आपका माहौल सुखद बन जाता है तो हम उसे सफलता कहते हैं.
मानवीय प्रसन्नता को कई अलग-अलग तरीकों से देखा जा सकता है. इसे देखने का एक सरल तरीका यह है कि हर इंसानी अनुभव का एक रासायनिक आधार होता है, जिसे आप शांति, खुशी, प्रेम, उथल-पुथल, शांतचित्तता, यंत्रणा, परमानंद कहते हैं - हर चीज का एक रासायनिक आधार है. स्वास्थ्य और बीमारी का भी एक रासायनिक आधार है. आज, पूरा औषधिविज्ञान आपकी सेहत को केमिकल के इस्तेमाल से संभालने की कोशिश कर रहा है. एक चिकित्सक का काम केमिस्ट्री के ऑर्केस्ट्रा को संभालने की कोशिश करना है. हर मानसिक बीमारी को मुख्यतया बाहर से केमिकल देकर संभाला जा रहा है.
हम अपने अंदर केमिकल डालकर प्रसन्नता को संभालने की कोशिश कर रहे हैं. अमेरिका में, ऐसा बताया जाता है कि सत्तर प्रतिशत लोग किसी न किसी तरह की डॉक्टरी दवाओं पर निर्भर हैं. सबसे समृद्ध देश में, जहां पोषण और जीवनशैली के लिए जबरदस्त चुनाव मौजूद हैं, सत्तर प्रतिशत लोग डॉक्टरी दवाओं पर चल रहे हैं! आप अपने विवेक और स्वास्थ्य को बाहर से केमिकल लेकर चलाने की कोशिश कर रहे हैं.
इंसानी शरीर एक बहुत जटिल केमिकल फैक्ट्री है. उसे बाहर से संभालना बहुत कठिन है. आप उसे अंदर से संभाल सकते हैं, लेकिन उसके लिए आपके पास अपनी आंतरिकता तक पहुंच होनी चाहिए! योग आपको अपने भीतर धड़कते हुए सृष्टि के स्रोत तक पहुंच प्रदान करता है. आपके अंदर एक ऐसी बुद्धिमत्ता मौजूद है, जो चावल के दाने या एक केले या रोटी के एक टुकड़े को एक इंसान में रूपांतरित कर सकती है. रोटी के एक टुकड़े से, आप धरती पर सबसे जटिल कार्यप्रणाली का निर्माण करते हैं! अगर इस बुद्धिमत्ता की एक बूंद भी आपके दैनिक जीवन में प्रवेश करती है, तो आप जादुई जीवन जिएंगे.
सबसे जबरदस्त इंजीनियर आपके अंदर ही है. इसी आधार पर हमने इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम बनाया है - जीवन का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के लिए अपनी आंतरिकता को इंजीनियर करने की विधि. जिस तरह हम पैदा होते हैं, जिस तरह हम जीते, सोचते, महसूस करते, और अपने जीवन को अनुभव करते हैं, हमें कहां प्राप्त होगा और हम कैसे मरेंगे - हर चीज व्यक्ति के द्वारा तय होती है.