मध्य प्रदेश के छतरपुर से इंसानियत शर्मसार कर देने वाली खबर सामने आई है. यहां एक दलित को ग्राम पंचायत कार्यालय में कुर्सी पर बैठना भारी पड़ गया. उसे उच्च जाति वालों ने बराबरी पर बैठने की बात कहते हुए जमकर पीटा. फिर पंचायत कार्यालय से बाहर निकाल दिया.
मामला मातगुवां थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत चौका का है. एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, बिजावर के पुलिस उप-विभागीय अधिकारी रघु केसरी ने सोमवार को इस दावे का खंडन किया कि दलित शख्स को कुर्सी पर बैठने के लिए पीटा गया है. पुलिस ने कहा कि वह उसकी पिटाई दुश्मनी के चलते हुई है. जिसमें वह जख्मी हो गया. मामले में दलित शख्स को पीटने वाले आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. फरार आरोपी की तलाश की जा रही है.
लेकिन पीड़ित शख्स की पत्नी ने कहा कि उसके पति की पिटाई रोहित सिंह ठाकुर और उसके दोस्तों ने ग्राम पंचायत में कुर्सी पर बैठने को लेकर ही की है. पीड़ित की पत्नी ने बताया कि रोहित इस बात से नाराज था कि एक दलित कैसे ग्राम पंचायत कार्यालय की कुर्सी पर बैठ सकता है. इस कुर्सी पर सिर्फ ठाकुर ही बैठ सकते हैं.
महिला ने बताया कि उसने इस बारे में पुलिस में मामला भी दर्ज करवाया. लेकिन उन्होंने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की. अब उसे डर लग रहा है कि कहीं लोग उसके परिवार को नुकसान ना पहुंचाएं.
वहीं, चौका ग्राम पंचायत सचिव अरविंद कुमार अहिरवार ने बताया कि पीड़ित शनिवार को कपिल धारा योजना के तहत कुएं के निर्माण के लिए कागजात जमा करने के लिए कार्यालय आया था. उन्होंने बताया कि पीड़ित जब कुर्सी पर बैठा तो रोहित ठाकुर ने इस पर आपत्ति जताते हुए उसके साथ मारपीट की. इसके बाद रविवार को भी ठाकुर अपने दोस्तों के साथ पीड़ित के घर पहुंचा और वहां भी उसने मारपीट की.
मारपीट के कारण दलित शख्स गंभीर रूप से घायल हो गया. उसके हाथ में फ्रैक्चर आया है और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी चोट के कई निशान है. फिलहाल पीड़ित का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है.
उधर, गांव के सरपंच कृष्ण गोपाल अहिरवार ने भी दावा किया कि पीड़ित को इसलिए पीटा गया क्योंकि वह कार में पंचायत कार्यालय आया और कुर्सी पर बैठ गया. फिर रविवार को भी पीड़ित के घर जाकर आरोपियों ने उसकी जमकर पिटाई की.