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सिर पर जलता खप्पर, दहकते कंडों का घेरा... चार महीने चलेगी अनोखी 'श्री श्री कोठ खप्पर तपस्या'

'श्री श्री कोठ खप्पर तपस्या' के दौरान संत जलते कंडों का घेरा बनाकर अपने सिर पर जलता हुआ खप्पर रखकर भगवान शिव की आराधना करते हैं. इस तप के तहत पंच धूनी, सप्त धूनी, द्वादश धुनी के रूप में तपस्या की जाती है. यह कठिन तपस्या श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर महंत बालकदासजी महाराज के सानिध्य में की जा रही है.

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तपस्या करता हुआ संत.
तपस्या करता हुआ संत.

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खरगोन (Khargaon) में साधु-संतों की अनोखी तपस्या शुरू हुई है. कई सारे साधु-संत सिर पर जलता हुआ खप्पर रखकर दहकते कंडो के गोल घेरे के बीच बैठकर तपस्या करते हैं. यह तपस्या बसंत पंचमी से गंगा दशहरा यानि के चार महीने तक लगातार चलती है. सर्दी से लेकर भीषड़ गर्मी के तक हर रोज साधु-संत यह कठिन तपस्या जारी रखते हैं. 

नर्मदा किनारे कठिन तपस्या

खरगोन जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर बड़वाह के नर्मदा किनारे नावघाटखेड़ी स्थित सुंदर धाम आश्रम में संतों की ''श्री श्री कोठ खप्पर धुनी तपस्या'' शुरू हुई है. बसंत पंचमी (जनवरी) से लेकर गंगा दशहरे (मई महीने) तक हर रोज दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक (तीन घंटे) तक यह कठिन तपस्या साधु-संत करते हैं. 

देखें वीडियो...

भगवान शिव की करते हैं आराधना

श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर महंत बालकदासजी महाराज के सानिध्य में ''श्री श्री कोठ खप्पर तपस्या'' के दौरान संत जलते कंडों का घेरा बनाकर अपने सिर पर जलता हुआ खप्पर रखकर भगवान शिव की आराधना करते हैं. इस तप के तहत पंच धूनी, सप्त धूनी, द्वादश धुनी के रूप में तपस्या की जाती है. 

बताया गया है कि नावघाटखेड़ी स्थित सुंदर धाम आश्रम में यह परंपरा ब्रह्मलीन संत श्री सुन्दर दास जी महाराज के समय से चली आ रही है. आश्रम के गादीपति श्री श्री 1008 महंत बालकदास जी महाराज इस तप को पिछले कई वर्षो से कर रहे है. इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त आश्रम पहुंचते हैं.

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कड़ाके की सर्दी से लेकर भीषण गर्मी झेलते हैं संत

लगातार चार महीने तक हर रोज तीन घंटे तक यह कठिन तपस्या संतों की जारी रहती है. खुले आसमान में जमीन पर बैठे संत जनवरी की कड़ाके की ठंडे से लेकर मई महीने की भीषण गर्मी झेलते हैं. मगर, उनकी तपस्या नहीं रुकती है. इसी तरह जारी रहती है.

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