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महाकाल भक्तों के लिए खुशखबरी: संध्या और शयन आरती की बुकिंग अब पूरी तरह ऑनलाइन, जानें कैसे करें बुक

Mahakal Sandhya Aarti Online Booking: उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दर्शन और आरती व्यवस्था को लेकर एक बड़ा डिजिटल सुधार किया गया है. अब 'संध्या आरती' और 'शयन आरती' की बुकिंग के लिए श्रद्धालुओं को घंटों कतार में लगने या परेशान होने की जरूरत नहीं होगी.

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दोपहर 12 बजे से खुलेगी संध्या आरती की बुकिंग.(File Photo)
दोपहर 12 बजे से खुलेगी संध्या आरती की बुकिंग.(File Photo)

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए डिजिटलाइजेशन में इजाफा किया है. अब भस्म आरती की तर्ज पर संध्या और शयन आरती में शामिल होने के लिए ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य कर दी गई है. यह कदम मंदिर व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और 'बिचौलियों' पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है.

अब देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु घर बैठे ही आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आरती में शामिल होने के लिए अपना स्थान सुनिश्चित कर सकेंगे.

श्रद्धालु श्री महाकालेश्वर मंदिर की अधिकृत वेबसाइट https://www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in/ के माध्यम से ही बुकिंग कर सकते हैं.

संध्या आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से शुरू होगी और शयन आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग प्रतिदिन शाम 4 बजे से की जा सकेगी.

दोनों ही आरतियों के लिए प्रति श्रद्धालु 250 रुपये का शुल्क (शीघ्र दर्शन के समान) निर्धारित किया गया है. बुकिंग की यह प्रक्रिया पूरी तरह 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर संचालित होगी.

प्रवेश के नियम और समय सीमा

एंट्री गेट: बुकिंग वाले श्रद्धालुओं को प्रवेश द्वार क्रमांक 1 से ही प्रवेश दिया जाएगा.

समय सीमा (संध्या आरती): शाम 6 बजे तक प्रवेश करना अनिवार्य है.

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समय सीमा (शयन आरती): रात 10 बजे तक ही अंतिम प्रवेश मिल सकेगा.

'चलित दर्शन' रहेंगे जारी

आरती की बुकिंग न मिलने पर निराश होने की जरूरत नहीं है. मंदिर प्रबंधन ने साफ किया है कि आरती के दौरान भी सामान्य 'चलित दर्शन' व्यवस्था जारी रहेगी. कतार में लगे श्रद्धालु चलते हुए बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर सकेंगे, हालांकि वे आरती के लिए एक स्थान पर बैठ नहीं पाएंगे.

इस पहल का उद्देश्य
मंदिर समिति के अनुसार, इस ऑनलाइन व्यवस्था से देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को पहले से ही अपना स्थान तय करने में मदद मिलेगी. इससे भीड़ प्रबंधन बेहतर होगा और दर्शनार्थियों को एक व्यवस्थित और दिव्य अनुभव प्राप्त होगा.

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