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ट्विशा शर्मा डेथ केस: आरोपी पति समर्थ सिंह की वकालत पर रोक, BCI ने निलंबित किया लाइसेंस

भोपाल में ट्विशा शर्मा मौत मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने बड़ा कदम उठाते हुए आरोपी पति और वकील समर्थ सिंह का लाइसेंस अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया है. बीसीआई ने कहा कि समर्थ पर लगे दहेज हत्या, क्रूरता और जांच में सहयोग न करने जैसे गंभीर आरोप वकालत के पेशे की गरिमा पर सवाल खड़े करते हैं.

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बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने ट्विशा शर्मा मौत मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह का वकालत लाइसेंस निलंबित किया. (Photo: Isntagram)
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने ट्विशा शर्मा मौत मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह का वकालत लाइसेंस निलंबित किया. (Photo: Isntagram)

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में बड़ा कदम उठाते हुए, आरोपी पति समर्थ सिंह का लॉ प्रैक्टिस लाइसेंस अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया है. बीसीआई ने यह फैसला समर्थ पर उनकी पत्नी ट्विशा शर्मा के मौत के मामले में दहेज हत्या और क्रूरता जैसे गंभीर आरोपों को देखते हुए लिया है.

बार काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश विधि पेशे की गरिमा बनाए रखने के लिए एक अंतरिम कदम है और इससे आरोपी को कानून के तहत उपलब्ध बचाव या आपराधिक जांच की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी. बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि एडवोकेट समर्थ सिंह और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. बीसीआई के संज्ञान में यह भी आया है.

बीसीआई ने अपने आदेश में कहा है कि ये आरोप केवल एक आपराधिक मामला नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा असर वकालत के पेशे की गरिमा, अनुशासन और जनता के भरोसे पर पड़ता है.  बीसीआई के मुताबिक एक वकील सिर्फ सामान्य नागरिक नहीं होता, बल्कि वह न्यायालय का अधिकारी और न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. ऐसे में अधिवक्ताओं का आचरण कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को कमजोर करने वाला नहीं होना चाहिए.

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यह भी पढ़ें: 'न्याय के लिए जो भी जरूरी होगा हम करेंगे', ट्विशा शर्मा के दूसरे पोस्टमॉर्टम पर बोला दिल्ली AIIMS

बार काउंसिल ने कहा कि मामले की गंभीरता, पत्नी की संदिग्ध मौत में वकील पति की कथित भूमिका, आपराधिक मामला दर्ज होने जैसी परिस्थितियों को देखते हुए तत्काल अंतरिम कार्रवाई जरूरी हो गई थी. आदेश के मुताबिक अधिवक्ता समर्थ सिंह को अगली सुनवाई और अनुशासनात्मक समिति के अंतिम निर्णय तक तत्काल प्रभाव से वकालत करने से निलंबित कर दिया गया है.

निलंबन अवधि के दौरान वह देश के किसी भी न्यायालय, ट्रिब्यूनल, प्राधिकरण या कानूनी मंच पर पेश नहीं हो सकेंगे. साथ ही वह किसी मामले में पैरवी, वकालतनामा दाखिल या स्वयं को प्रैक्टिस करने का अधिकार प्राप्त अधिवक्ता भी नहीं बता सकेंगे. बता दें कि समर्थ सिंह ने 22 मई को जबलपुर जिला कोर्ट में सरेंडर कर दिया. पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है.


 

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