अब चीं-चीं करती चिड़िया की आवाज हर किसी को सुनने को नहीं मिलती, न ही फुदकती हुई चिड़िया किसी आंगन में नजर आती है. कारण यह है कि जो गौरैया चिड़ियां कभी आम थीं, वे मौसम की मार और प्रकृति के बदलाव से लुप्त होने की कगार पर पहुंच गई हैं. उनकी संख्या बहुत कम हो गई है. अब कभी-कभार ही यह गौरैया दिखाई देती है, जिसे देखकर बुजुर्गों के चेहरों पर रौनक आ जाती है.
इसे बचाने के कागजी प्रयास तो बहुत होते हैं, लेकिन धरातल पर सार्थक परिणाम बहुत कम मिलते हैं. लगता है इस बार गर्मी में गौरैयों को जो कष्ट होते थे, उससे कुछ राहत मिलेगी. समाजसेवी रितेश अग्रवाल नापानेरा ने गौरैया चिड़ियों के लिए 5 हजार से अधिक घोंसले तैयार करवाए और हजारों घोंसलों का वितरण कर दिया है. पूरे जिले में हजारों घोंसलों का वितरण किया जाना है.
रितेश अग्रवाल नापानेरा ने बताया कि बाबा महाकाल की प्रेरणा से अग्रवाल समाज के तत्वावधान में लुप्त होती गौरैया को बचाने का यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा. जो आशियाने गौरैयों के लिए वितरित किए जा रहे हैं, उनमें महाकाल बाबा का रक्षा सूत्र बंधा हुआ है, जिससे विपत्तियों में भी बाबा के आशीर्वाद से रक्षा होगी.
अग्रवाल ने बताया कि बहुत सुंदर प्लाई से आशियाने तैयार करवाए गए हैं, जिनमें गर्मी से चिड़ियों को राहत मिलेगी और तीन-चार महीने तक वे महफूज रह सकेंगी.
उनकी पत्नी अंजना रितेश नापानेरा ने बताया कि बाबा महाकाल और महालक्ष्मी की प्रेरणा से यह प्रयास किया जा रहा है. महाकाल बाबा के मंदिर से आशियानों का वितरण शुरू किया गया था, ताकि उनका आशीर्वाद लेकर लुप्त गौरैया फिर से वातावरण में चीं-चीं का शोर मचाते हुए फुदकें और मन प्रसन्न हो जाए.
पूरे नापानेरा परिवार की ओर से गौरैया चिड़ियों को लुप्त होने से बचाने के लिए भरपूर प्रयास हो रहे हैं. उनके बेटे राघव अग्रवाल ने बताया कि 5 हजार घोंसले तैयार करवाए गए हैं और हर उस व्यक्ति तक पहुंचाए जा रहे हैं जो चिड़ियों को लेकर सजग है. घर-घर तक भी वितरण किया जा रहा है.
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी इस गौरैया बचाने के अभियान को आगे बढ़ाया है और आशियाने वितरित किए हैं. महेश अग्रवाल ने रितेश नापानेरा के इस अभियान की सराहना की और कहा कि गौरैया चिड़ियां लगभग खत्म हो रही हैं. यदि प्रयास नहीं किए तो पूरी तरह लुप्त हो जाएंगी.
पार्षद ज्ञानू विजय ने कहा कि पक्षियों को बचाने का यह बहुत सुंदर प्रयास है. इससे गर्मी में परेशान होने वाली चिड़ियों को इन घोंसलों से राहत मिलेगी.
वरिष्ठ पत्रकार गोपाल राही ने बताया कि गौरैया संरक्षण के लिए रितेश नापानेरा का प्रयास सराहनीय है. इन घोंसलों के वितरण का परिणाम अगले वर्ष दिखेगा, जब चिड़ियां चहचहाती नजर आएंगी. हो सके तो चिड़ियों के संरक्षण के लिए प्रजनन केंद्र भी बनाकर उन्हें लुप्त होने से बचाना चाहिए.