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'2 साल बाद MP की सड़कों पर कोई आवारा मवेशी नहीं दिखेगा', BJP सरकार ने विधानसभा में किया वादा

MP विधानसभा के बजट सत्र में 'आवारा मवेशियों' की समस्या पर तीखी बहस हुई. कांग्रेस विधायकों द्वारा उठाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में सरकार ने एक बड़ा वादा किया है. पशुपालन मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि अगले दो वर्षों में प्रदेश की सड़कों से आवारा मवेशियों की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी.

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भोपाल में सिक्स-लेन पर लगे पौधे चर गए मवेशी.
भोपाल में सिक्स-लेन पर लगे पौधे चर गए मवेशी.

मध्य प्रदेश सरकार ने भरोसा दिलाया कि दो साल बाद राज्य की सड़कों पर कोई आवारा मवेशी घूमता हुआ नहीं दिखेगा. सरकार का यह भरोसा तब आया जब कुछ कांग्रेसी MLA ने आवारा मवेशियों की वजह से होने वाले सड़क हादसों पर चिंता जताई.

कांग्रेस MLA अजय सिंह और कैलाश कुशवाहा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया और कहा कि मध्य प्रदेश में आवारा मवेशियों की समस्या गंभीर हो गई है.

उन्होंने कहा कि सरकार के  करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद राज्य में लगभग 10 लाख आवारा मवेशी सड़कों पर घूम रहे हैं, जिससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान हो रहा है, नेशनल हाईवे और दूसरी सड़कों पर ट्रैफिक में रुकावट आ रही है और हादसों की घटनाएं बढ़ रही हैं.

सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही की वजह से इस समस्या को ठीक से हल नहीं किया जा रहा है, जिससे किसानों और दूसरे लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. 

'जुर्माना और नई नीति से होगा समाधान'

जवाब देते हुए राज्य के पशुपालन और डेयरी मंत्री लखन पटेल ने कहा कि आवारा पशुओं का मैनेजमेंट ग्रामीण इलाकों में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग और शहरी इलाकों में शहरी और आवास विकास विभाग की जिम्मेदारी है, और संबंधित विभाग लगातार कार्रवाई कर रहे हैं.

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मंत्री ने कहा कि 2025 में राज्य में शहरी निकायों द्वारा लगभग 78 हजार 153 आवारा पशु पकड़े गए और इन पशुओं के मालिकों पर कुल 25 लाख 58 हजार 753 रुपये का जुर्माना लगाया गया. राज्य में कुल 3 हजार 40 गौशालाएं चल रही हैं, जिनमें मुख्यमंत्री गौ सेवा योजना के तहत 2 हजार 325 गैर-सरकारी संगठनों द्वारा 703 और शहरी निकायों द्वारा 12 शामिल हैं.

पटेल ने कहा कि लगभग 4.80 लाख आवारा पशुओं को गौशालाओं में ले जाया गया है और उनका मैनेजमेंट एक लगातार चलने वाला प्रोसेस है.

मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य सरकार ने 'मध्य प्रदेश में आत्मनिर्भर गाय आश्रय स्थलों की स्थापना राज्य नीति-2025' को मंजूरी दे दी है. इसका मकसद ऐसी आश्रय इकाइयों को आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार के मौके पैदा करना है, साथ ही बेसहारा मवेशियों का बेहतर मैनेजमेंट करना है.

उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत, कम से कम 5000 मवेशियों की क्षमता वाले आत्मनिर्भर गाय आश्रय (कामधेनु निवास) के लिए कम से कम 130 एकड़ रेवेन्यू जमीन दी गई है, जिसमें से 5 एकड़ जमीन का इस्तेमाल कमर्शियल गतिविधियों के लिए किया जा सकता है.

मंत्री के अनुसार, गाय आश्रय स्थलों में मौजूद मवेशियों के रखरखाव के लिए अनुदान राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति जानवर प्रति दिन कर दी गई है.

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पटेल ने कहा, "अगले दो सालों में जब नई गाय आश्रय स्थल बन जाएंगी और व्यवस्था हो जाएगी, तो बेसहारा मवेशी सड़कों पर नहीं दिखेंगे. मेरा विश्वास कीजिए. दो साल बाद, सड़कों पर एक भी गाय नहीं दिखेगी." 

विधानसभा स्पीकर की टिप्पणी

मध्य प्रदेश विधानसभा के स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि गौशालाओं को कमर्शियली आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत है, साथ ही गौ रक्षा और सेवा के जरिए उन्हें बढ़ावा देने की भी जरूरत है. उन्होंने कहा कि देश की पहली गौ अभ्यारण्य पहले शाजापुर में बनाई गई थी, लेकिन इस एरिया में अभी और काम करने की ज़रूरत है.

तोमर ने कहा कि इस समस्या के परमानेंट समाधान के लिए सरकार और सभी स्टेकहोल्डर्स को मिलकर गंभीर कोशिशें करनी होंगी.

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