इंदौर के भागीरथपुरा में फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप और उससे हुई मौतों की जांच अब प्रदेश स्तर के सीनियर अफसर करेंगे. राज्य सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय कुमार शुक्ला के नेतृत्व में इस कमेटी का गठन किया है.
ACS संजय कुमार शुक्ला की अध्यक्षता वाली यह कमेटी इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पानी में मिलावट के असली कारणों और मुख्य तथ्यों की जांच करेगी और प्रशासनिक, तकनीकी और मैनेजमेंट की कमियों का विश्लेषण करेगी.
अफसर ने बताया कि यह घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करेगी, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी सिफारिशें करेगी और जांच के तहत मामले से संबंधित या जरूरी समझे जाने वाले अन्य मामलों को भी शामिल करेगी.
कमेटी संबंधित विभागों से जरूरी रिकॉर्ड, रिपोर्ट और जानकारी लेगी और यदि जरूरी हो, तो मौके पर जाकर मुआयना भी करेगी. अधिकारी ने बताया कि यह कमेटी एक महीने के भीतर राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट सौंप देगी.
शुक्ला के अलावा, समिति के अन्य सदस्यों में PHE के प्रमुख सचिव पी नरहरि और शहरी प्रशासन एवं विकास निदेशालय कमिश्नर संकेत भोडावे शामिल हैं.
इंदौर संभागीय कमिश्नर सुदाम खाड़े को सदस्य-सचिव बनाया गया है. राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के सामने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में पानी में मिलावट की त्रासदी में मरने वालों की संख्या 7 बताई है, जिसमें एक 5 महीने का बच्चा भी शामिल है.
हालांकि, सरकारी महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की एक समिति की तैयार ऑडिट रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भागीरथपुरा में 15 लोगों की मौत किसी न किसी तरह से इस बीमारी के फैलने से जुड़ी हो सकती है.
भागीरथपुरा के निवासियों ने दावा किया कि पिछले महीने इलाके में उल्टी और दस्त फैलने से अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है.
प्रशासन ने बीमारी फैलने के बाद मरने वाले 21 लोगों के परिवारों को 2 लाख रुपये का मुआवजा दिया है. कुछ मौतें अन्य बीमारियों और कारणों से हुई थीं, लेकिन अधिकारियों ने मानवीय आधार पर सभी पीड़ित परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान की.