भारत आज इतिहास रचने जा रहा है. चंद्रयान-3 का लैंडर आज शाम 5 बजकर 45 मिनट पर चांद की ओर बढ़ना शुरू करेगा और शाम 6 बजकर 4 मिनट पर इसरो उसकी सॉफ्ट लैंडिंग कराएगा. चंद्रयान-3 की लैडिंग पर भारत ही नहीं पूरे विश्व की नजरें टिकी हुई हैं. इसी को लेकर केंद्रीय विमानन और नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से बात की गई. सिंधिया ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में चांद पर तिरंगा झंडा गाड़ने का काम इसरो के द्वारा किया जाएगा.
दरअसल, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया आज ग्वालियर पहुंचे हैं. उन्होंने कहा ''आज इतिहास रचा जाएगा, जब भारत का तिरंगा झंडा प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में चांद पर गाड़ने का काम इसरो के द्वारा किया जाएगा. हमारे वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों के द्वारा सफलता पूर्वक किया जाएगा. इतिहास रचने के लिए पूरा भारत उत्सुकता के साथ इंतजार कर रहा है. यह एक ऐसा समय है जिस समय में हमारे पिछले 9 सालों की मेहनत-मशक्कत काम आने वाली है. वैज्ञानिकों और सरकार की सफलता की तरफ हम लोग आगे बढ़ रहे हैं. इससे भारत का नया परचम विश्व में लहराएगा, इसका हमें पूर्ण विश्वास है.
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यहां देख सकते हैं चंद्रयान-3 की ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग
चंद्रयान-3 की लैंडिंग का लाइव प्रसारण 23 अगस्त 2023 की शाम 5 बजकर 27 मिनट से शुरू हो जाएगा. इसे ISRO की वेबसाइट...ISRO की वेबसाइट... isro.gov.in, YouTube पर... youtube.com/watch?v=DLA_64yz8Ss, Facebook पर... Facebook https://facebook.com/ISRO या फिर डीडी नेशनल टीवी चैनल पर देखा जा सकता है.
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लैंडिंग के समय कितनी होगी स्पीड?
विक्रम लैंडर जिस समय चांद की सतह पर उतरेगा, उस समय उसकी गति 2 मीटर प्रति सेकेंड के आस-पास होगी. लेकिन हॉरीजोंटल गति 0.5 मीटर प्रति सेकेंड होगी. विक्रम लैंडर 12 डिग्री झुकाव वाली ढलान पर उतर सकता है. इस गति, दिशा और समतल जमीन खोजने में ये सभी यंत्र विक्रम लैंडर की मदद करेंगे. ये सभी यंत्र लैंडिंग से करीब 500 मीटर पहले एक्टिवेट हो जाएंगे.
चंद्रयान-3 की लैंडिंग के बाद क्या होगा?
सफल लैंडिंग होने के साथ ही विक्रम लैंडर से रैंप के ज़रिए 6 पहियों वाला प्रज्ञान रोवर बाहर आएगा और ISRO की कमांड मिलते ही चांद की सतह पर चलेगा लेकिन ये उतना आसान नहीं है, जितना लग रहा है क्योंकि जब लैंडिंग की प्रक्रिया आखिरी चरण में होगी तो आखिरी 17 मिनट सबसे मुश्किल और चुनौती से भरे होंगे. इन 17 मिनट में लैंडर खुद से ही काम करेगा. इस दौरान इसरो से कोई भी कमांड नहीं दी जा सकेगी. इस दौरान लैंडर को सही समय, सही ऊंचाई और सही मात्रा में ईंधन का इस्तेमाल करते हुए लैंडिंग करनी होगी और गलती की कोई भी गुंजाइश नहीं होगी.
साउथ पोल पर उतरने वाले पहला देश बनेगा भारत
चंद्रयान-3 की कामयाबी हिंदुस्तान का डंका बजा देगी. भारत चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरने वाले पहला देश बन जाएगा और फिर सारी दुनिया चंद्रयान-3 के जरिए आगे की रिसर्च करेगी. भारत के मून मिशन के सिर पर कामयाबी का ये सेहरा आखिरी 17 मिनट में होने वाले सटीक एक्शन से बंधेगा. इसीलिए देश-दुनिया की धड़कनें बढ़ाने वाले 17 मिनट को भारत को सुपर पावर बनाने वाले साबित होंगे.