इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से नागरिकों की मौत और कई लोगों के बीमार होने के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है. संभाग आयुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने नगर निगम आयुक्त श्री दिलीप कुमार यादव के प्रस्ताव पर एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (नर्मदा) संजीव श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं.
आदेश के अनुसार संजीव श्रीवास्तव पर अपने पदस्थ दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और उदासीनता बरतने के गंभीर आरोप पाए गए हैं. निलंबन के साथ ही उनका मुख्यालय मुख्य अभियंता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, इंदौर निर्धारित किया गया है. वहीं, नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव का ट्रांसफर कर दिया गया है.
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भागीरथपुरा घटना की प्रारंभिक जांच
दरअसल, यह कार्रवाई नगर निगम इंदौर के जोन क्रमांक-04 के वार्ड क्रमांक-11 स्थित भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई गंभीर घटना के बाद की गई है. यहां नर्मदा जलप्रदाय लाइन में ड्रेनेज का पानी मिल गया था. इस दूषित पानी को पीने से कई नागरिकों को संक्रमण हुआ, जिसमें कुछ लोगों की मौत हो गई और कई लोग इलाजरत हैं.
घटना के बाद प्रशासन द्वारा प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसमें यह सामने आया कि एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (नर्मदा) संजीव श्रीवास्तव ने अपने दायित्वों का ठीक से पालन नहीं किया और गंभीर लापरवाही बरती. जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें तत्काल निलंबित किया गया.
मीडिया से बचते दिखे अधिकारी
घटना के बाद भागीरथपुरा पहुंचे मीडिया कर्मियों ने जब जल कार्य प्रभारी संजीव श्रीवास्तव से सवाल पूछने की कोशिश की, तो वे वहां से निकलते नजर आए. मीडिया के सवालों पर उन्होंने कहा कि वे मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं हैं और सवाल निगम आयुक्त या अपर आयुक्त से पूछे जाएं.
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बताया गया कि मौके पर जहां वे बैठे थे, वहां बिसलेरी की बोतलें रखी थीं. मोबाइल देखते ही वे बाइक पर बैठकर वहां से निकल गए. इसी दिन मुख्यमंत्री स्तर पर भी कार्रवाई करते हुए अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और जल कार्य प्रभारी संजीव श्रीवास्तव को पद से हटाया गया.
प्रशासनिक सख्ती का संकेत
इस पूरे मामले में निलंबन की कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है. दूषित जल से नागरिकों की जान जाने की घटना ने निगम और जल आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. प्रारंभिक जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय करते हुए यह कदम उठाया गया है.