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डिप्रेशन या फिर वर्कलोड... एनेस्थीसिया का हाई डोज लगाने वाली AIIMS भोपाल की डॉ. रश्मि वर्मा के मौत से खड़े हुए कई सवाल

मध्य प्रदेश के भोपाल एम्स में कार्यरत प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा ने ड्यूटी से घर लौटने के बाद एनेस्थीसिया इंजेक्शन का हाई डोज लगा लिया था. जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें इलाज के लिए एम्स भोपाल में भर्ती कराया गया था. लेकिन उनकी 5 जनवरी को मौत हो गई.

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एम्स भोपाल की डॉक्टर रश्मि. (File Photo: Dharmendra Sahu/ITG)
एम्स भोपाल की डॉक्टर रश्मि. (File Photo: Dharmendra Sahu/ITG)

एनेस्थीसिया इंजेक्शन का हाई डोज लगाने वाली प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा की मौत हो गई. पिछले 24 दिनों से वह वेंटिलेटर पर रही थीं. उनके घर से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था. जिसमें लिखा गया था मैं खुद आत्महत्या कर रही हूं. इसका कोई दोषी नहीं है. फिलहाल पुलिस ने हैंडराइटिंग एक्सपर्ट को सुसाइड नोट भेज दिया है.

हॉस्पिटल से घर जाने के बाद लगाया था इंजेक्शन 

डॉ. रश्मि वर्मा ने हॉस्पिटल से घर जाने के बाद इंजेक्शन लगाया था. उनके घर से एक सुसाइड नोट भी मिला था. जिसमें उन्होंने कहा कि मैं खुद ऐसा कर रही हूं. वहीं परिवार के लोग बोले कि पिता की मौत के बाद से ही वह डिप्रेशन में थीं. मामले की जांच कर रही एसीपी पुलिस अदिति भावसार  ने बताया कि सुसाइड नोट को हैंडराइटिंग एक्सपर्ट को भेजा गया है.

यह भी पढ़ें: 'मेरी मौत की जिम्मेदार मैं खुद हूं...', 24 दिन बाद जिंदगी की जंग हारी डॉक्टर, लगाया था एनेस्थीसिया इंजेक्शन हाई डोज

एम्स में इलाज के दौरान डॉक्टर रश्मि वर्मा का ब्रेन डेड हो गया था और वह पिछले 24 दिनो से वेंटिलेटर पर थीं. हालांकि उनकी आत्महत्या से एम्स के टॉक्सिक वर्क कल्चर पर भी सवाल उठने लगे हैं. रश्मि वर्मा के पति भी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ हैं. 

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11 दिसंबर को लगाया था एनेस्थीसिया का हाई डोज

डॉ. रश्मि वर्मा ने एनेस्थीसिया इंजेक्शन का हाई डोज घर में 11 दिसंबर को लगाया था. जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई थी. डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन 5 जनवरी की उनकी मौत हो गई. एम्स प्रशासन के मुताबिक 5 जनवरी की सुबह करीब 11 बजे डॉ. रश्मि वर्मा ने अंतिम सांस ली.

इसके बाद उनका शव परिजनों को सौंप दिया गया. उन्होंने बेहोशी की दवा (एनेस्थीसिया) की अत्यधिक मात्रा का सेवन किया था. उनके पति ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन शाक्य उन्हें बेहोशी की अवस्था में एम्स लेकर पहुंचे थे. डॉक्टर के मुताबिक अस्पताल पहुंचने में लगभग 25 मिनट का समय लग चुका था. इस दौरान डॉ. रश्मि का हृदय करीब 7 मिनट तक पूरी तरह से काम करना बंद कर चुका था.

इमरजेंसी विभाग में पहुंचते ही डॉक्टरों ने तत्काल सीपीआर शुरू किया. तीन बार रेससिटेशन प्रक्रिया के बाद उनकी धड़कन दोबारा लौटाई जा सकी, लेकिन तब तक मस्तिष्क को भारी नुकसान हो चुका था. घटना के 72 घंटे बाद कराई गई एमआरआई जांच में ‘ग्लोबल हाइपोक्सिक ब्रेन इंजरी’ की पुष्टि हुई थी. इसका मतलब है कि लंबे समय तक दिमाग़ को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाया. 

चिकित्सकों के अनुसार यह स्थिति आमतौर पर कार्डियक अरेस्ट के बाद होती है और इसमें मरीज के ठीक होने की संभावना बेहद कम होती है. डॉ. रश्मि वर्मा बीते 24 दिनों से एम्स के मुख्य आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं. विशेषज्ञों की टीम लगातार उनकी हालत पर नजर रखे हुए थी, लेकिन दिमाग़ को हुआ नुकसान इतना गंभीर था कि कोई सकारात्मकता सुधार नहीं हो सका. डॉ. रश्मि वर्मा ने प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर से एमडी (जनरल मेडिसिन) की डिग्री हासिल की थी.

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गरीबों की करती थीं मदद

वे एम्स भोपाल के अलावा एलएन मेडिकल कॉलेज और पीएमएस भोपाल में भी अपनी सेवाएं दे चुकी थीं. उनकी पहचान एक समर्पित चिकित्सक के रूप में थी. गरीब और जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए वे कई बार इलाज का खर्च स्वयं वहन करती थीं. वर्तमान में वे सीपीआर ट्रेनिंग प्रोग्राम की नोडल अधिकारी भी थीं.  

एसीपी पुलिस अदिति भावसार ने बताया कि डॉ. रश्मि वर्मा अवधपुरी थाना क्षेत्र में रहती थी. प्रारंभिक जांच में घरवालों का कहना है कि पिता के मौत के बाद डॉ. रश्मि वर्मा परेशान थीं. उनको किसी बात की तकलीफ नहीं थी. परिजनों ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है. मामले में आगे की जांच जारी है. 

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