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बैतूल में 3 दिन तक कैमरे की निगरानी में रहा रिटायर्ड बैंक अफसर, ₹23 लाख गंवाए, गोल्ड लोन लेते समय खुला राज

cyber crime: बैतूल में रिटायर्ड बैंक अधिकारी बसंत कुमार को ठगों ने 3 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 23.50 लाख रुपये ठग लिए. बैंक मैनेजर की सूझबूझ से करोड़ों का सोना बिकने से बचा. जानें कैसे बचें डिजिटल अरेस्ट के जाल से...

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बैतूल में डिजिटल अरेस्ट का केस.(Photo:Screengrab)
बैतूल में डिजिटल अरेस्ट का केस.(Photo:Screengrab)

मध्य प्रदेश के बैतूल में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर बड़ी ठगी को अंजाम दिया है. बीते एक महीने के भीतर यह दूसरा बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने दिल्ली पुलिस का नाम लेकर एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी से 23 लाख 50 हजार रुपये की ठगी कर ली.

बैतूल निवासी रिटायर्ड बैंक अधिकारी बसंत कुमार मेदमवार के मोबाइल पर 27 नवंबर को एक कॉल आया. कॉलर आईडी पर दिल्ली पुलिस लिखा हुआ था. फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि बसंत कुमार के आधार कार्ड का उपयोग कर एक फर्जी सिम ली गई है, जिसका इस्तेमाल बड़े साइबर अपराध में हुआ है. साथ ही उनके घर में रखे सोने को भी अवैध बताया गया.

धमकी और गिरफ्तारी के डर से बुजुर्ग मानसिक दबाव में आ गए. इसके बाद साइबर ठगों ने उन्हें लगातार वीडियो कॉल और फोन पर निगरानी में रखते हुए तीन दिनों तक तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में रखा. इसी दौरान उन्होंने दो किस्तों में 23 लाख 50 हजार रुपये ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए.

इतना ही नहीं, शेष रकम देने के लिए ठगों के कहने पर बसंत कुमार बैंक में गोल्ड लोन लेने पहुंचे. बैंक मैनेजर ने जब देखा कि वे लगातार किसी के निर्देश पर फोन पर बात करते हुए घबराए हुए हैं, तो उसे संदेह हुआ. मैनेजर ने तुरंत पुलिस को सूचना दी.

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सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बुजुर्ग को समझाया कि वे किसी पुलिस अधिकारी से नहीं, बल्कि साइबर ठगों के जाल में फंसे हैं. समय रहते गोल्ड लोन की प्रक्रिया रुकवाई गई और तीन दिनों से चल रही डिजिटल अरेस्ट से उन्हें मुक्त कराया गया. हालांकि तब तक वे बड़ी रकम गंवा चुके थे.

पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. साइबर ठगों ने बसंत कुमार को 27 नवंबर से 1 दिसंबर तक डिजिटल अरेस्ट कर रखा था. मामले का खुलासा आज मंगलवार को हुआ.

DSP शैफ़ा हाशमी का कहना है कि बैंक से सूचना आई थी कि बसंत कुमार को डिजिटल अरेस्ट किया गया है. इसके बाद पुलिस पहुंची और गोल्ड लोन वाले पैसों को बचा लिया गया. उनके साथ 23 रुपए की ठगी की गई है. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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