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देर रात जागना और नाइट शिफ्ट बढ़ा रहे कैंसर का खतरा, एम्स की बड़ी रिसर्च

AIIMS भोपाल के वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाले शोध में खुलासा किया है कि आपकी अधूरी नींद और बिगड़ी हुई दिनचर्या सीधे तौर पर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को न्योता दे सकती है. जैवरसायन विभाग के प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार के इस शोध को इंटरनेशनल लेवल पर सराहा गया है और इसके लिए उन्हें 'बेस्ट पेपर अवॉर्ड' से भी नवाजा गया है.

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सावधान! आपकी जैविक घड़ी और कैंसर का है सीधा कनेक्शन. (Photo: Representational)
सावधान! आपकी जैविक घड़ी और कैंसर का है सीधा कनेक्शन. (Photo: Representational)

देर रात तक जागना, नाइट शिफ्ट और अनियमित दिनचर्या से रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम कमजोर होता और फिर कैंसर फैलने का रास्ता आसान हो जाता है. एम्स भोपाल की एक नई रिसर्च में नींद की गड़बड़ी और कैंसर के बीच यह छिपा हुआ गहरा संबंध सामने आया है.

एम्स के जैवरसायन विभाग के प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार की रिसर्च में सामने आया कि मानव शरीर एक प्राकृतिक दिन-रात के चक्र पर काम करता है, जिसे जैविक घड़ी या सर्कैडियन रिद्म कहा जाता है. यही चक्र हमारी नींद, हार्मोन, पाचन प्रक्रिया, ऊर्जा स्तर और रोगों से लड़ने वाली प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करता है. 

लेकिन देर रात तक जागने, नाइट ड्यूटी करने या लगातार शिफ्ट में काम करने से जब यह चक्र बिगड़ता है, तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है. ऐसी स्थिति में कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने और फैलने का अवसर मिल सकता है. वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि कैंसर कोशिकाएं शरीर की ऊर्जा प्रणाली को अपने लाभ के लिए बदल लेती हैं, जिससे प्रतिरक्षा कोशिकाएं उन्हें नष्ट नहीं कर पातीं.

यह रिसर्च आम नागरिकों के लिए अहम है, क्योंकि यह दर्शाता है कि कैंसर की रोकथाम केवल दवाओं तक सीमित नहीं है. लाइफस्टाइल में सुधार, जैसे नियमित और पर्याप्त नींद, समय पर भोजन और संतुलित दिनचर्या, कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक हो सकती है.

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शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य में कैंसर का इलाज अधिक व्यक्तिगत होगा, जिसमें मरीज की नींद, दिनचर्या और जैविक घड़ी को ध्यान में रखकर उपचार तय किया जाएगा. इससे इलाज अधिक प्रभावी होगा और दवाओं के दुष्प्रभाव भी कम हो सकते हैं.

एम्स के डॉक्टरों ने आम जनता के लिए संदेश दिया कि नियमित समय पर सोना और जागना, देर रात मोबाइल और स्क्रीन से दूरी रहना जरूरी है. इसके अलावा, भोजन और व्यायाम का समय तय करना बेहद आवश्यक है. हेल्दी लाइफस्टाइल न सिर्फ सामान्य बीमारियों से बचाव करती है, बल्कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ भी एक मजबूत सुरक्षा कवच बन सकती है.

एम्स भोपाल में कार्यपालक निदेशक और सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानंद कर ने कहा, " नींद और कैंसर के बीच छुपे संबंध पर किए गए शोध ने समाज और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए अहम जानकारी प्रदान की है. यह शोध न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से मूल्यवान है, बल्कि आम जनता के लिए जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में भी मार्गदर्शक साबित होगा."

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