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साहित्य आज तक: घर की मुर्गी, जो दाल से बढ़कर है

साहित्य आज तक: घर की मुर्गी, जो दाल से बढ़कर है

साहित्य आज तक 2017 के सत्र 'घर की मुर्गी' में कवि और पत्रकार देवांशु कुमार झा, पंकज शर्मा और सत्येंद्र श्रीवास्तव ने अपने अनुभव बताए. देवांशु, पंकज और सत्येंद्र ने अपनी कविताओं से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं.

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