कविता सुनने की चीज नहीं है...
मूलरूप से अमेठी गौरीगंज के रहने वाले मनोज मुंतशिर ने कहा कि कविता पढ़ने की चीज है, वो सुनने की चीज नहीं है, लेकिन हमारी संस्कृति और श्रोताओं का प्यार है, जिसकी वजह से आज कविताएं सुनी जाती हैं. फैज अहमद फैज की पक्तियां 'बोल कि लब आजाद हैं तेरे' का जिक्र करते हुए मुंतशिर ने कहा कि मैं ये तय नहीं कर पाया कि मैं कामयाब हूं या नाकाम, लेकिन जब मैं मनोज शुक्ला से मनोज मुंतशिर हुआ तो वो मेरे लिए बड़ी बात थी. क्योंकि मैंने शायरी के लिए बगावत की थी.
उन्होंने कहा कि मेरे पिताजी किसान है. 6 महीने खेतों में काम करते हैं और 6 महीने पूजा-पाठ और शादियां कराते हैं. ऐसे में गौरीगंज से मुंबई निकलना बड़ी चुनौती थी. उन्होंने बताया कि मैंने मुंबई आने के लिए पिताजी से 350 रुपये के ट्रेन के टिकट के मांगे थे, लेकिन उन्होंने मुझे 700 रुपये दिए. क्योंकि उन्हें लग रहा था मैं कुछ दिनों बाद वापस गौरीगंज लौट आऊंगा. हालांकि ऐसा हुआ नहीं और आज मैं मुंबई में मनोज मुंतशिर बनकर रहा हूं.
12वीं क्लास में हुआ था इश्क...मनोज मुंतशिर ने बताया कि उन्हें पहली बार इश्क 12वीं क्लास में हुआ था. कुछ दिन प्रेम में रहने बाद जब लड़की ने कहा कि मेरी पिताजी तुम्हे पंसद नहीं करते हैं और मेरी चिट्ठियां और फोटो लौटा दो. तब मैंने 'मैं तेर खत लौटा दूंगा, तू मेरी जवानी वापस दे' शायरी लिखी थी.
बाहुबली के डायलॉग का जिक्र...
'गलत किया देवसेना, औरत पर हाथ डालने वाले की काटते नहीं उंगलियां, काटते हैं गला... बाहुबली के डॉयलॉग लिखने वाले मनोज मुंतशिर ने अपने इस डॉयलाग पर दिल्लीवालों से राय मांगी तो लोगों ने हां में हामी भरी. महिलाओं पर अत्याचार को लेकर उन्होंने कहा कि जो औरत का दर्द नहीं समझता, मनोज मुंतशिर उसको मर्द नहीं समझता.
उन्होंने अपने गीत 'कौन तुम्हें यूं प्यार करेगा, जैसे मैं करती हूं' के बारे में बताया कि ये मैंने अपने बेटे आरव पर लिखा था. गीत की पंक्तियां थी कि 'मेरी अकेली जीत हो तुम, मैंने लिखा जो अपने लिए वो सबसे प्यारा गीत हो तुम.. कौन तुम्हें यूं चाहेगा जितना मैं करता हूं'. उन्होंने कहा कि मैंने अपने बेटे के लिए ये गीत लिखा था जो बाद में एमएस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी में फीमेल वर्जन में दिया.
नोट पुराने बंद हो गए, दोस्त पुराने चलते हैं: मनोज मुंतशिर