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साहित्य आजतक लखनऊ: 'नौकरी ढूंढ़ता रह जाएगा तू शहरों में...', वेलेंटाइन डे पर सजी शायरों की महफिल

साहित्य आजतक की लखनऊ महफिल के पहले दिन ‘इज़हार-ए-इश्क’ थीम पर नौजवान शायरों ने समां बांध दिया. पीयूष अग्निहोत्री ने वेलेंटाइन डे पर मोहब्बत और टूटे दिलों की नर्म-नोकझोंक भरी शायरी सुनाई तो वहीं चेतना बलहारा ने इकरार और लाज भरे इश्क को आवाज दी.

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साहित्य आजतक लखनऊ की महफिल में 'इज़हार-ए-इश्क' थीम पर मुशायरा आयोजित किया गया. (Photo: ITG)
साहित्य आजतक लखनऊ की महफिल में 'इज़हार-ए-इश्क' थीम पर मुशायरा आयोजित किया गया. (Photo: ITG)

"तुम ये ना समझ लेना कि घबराए हुए हैं
हम वक्त के तूफान से टकराए हुए हैं
जो छीनने आए हैं मेरे मुंह से निवाला
वो मेरे बुजुर्गों का नमक खाए हुए हैं"

लखनऊ में साहित्य आजतक की महफिल सज चुकी है. पहले दिन चमकती धूप में सबसे पहले नौजवान शायरों ने समां बांधा. 'इज़हार-ए-इश्क' की थीम पर आयोजित मुशायरे की शुरुआत पीयूष अग्निहोत्री ने की. उन्होंने पहला शेर पढ़ा, 

"चंद लम्हों में ये बरसात चली जाएगी
मेरे आशिक ये हसीं रात चली जाएगी
नौकरी ढूंढ़ता रह जाएगा तू शहरों में
उसको लेकर कोई बारात चली जाएगी"

वेलेंटाइन डे के दिन पीयूष अग्निहोत्री की शायरी टूटे हुए दिलों और जख्मी आशिकों को करार देने वाली थी. 

"अबके हर एक फूल को डाली से खतरा हो गया
बागबां में फूल को माली से खतरा हो गया
दुश्मनों से खैर होता है मगर हैरत करें
आदमी को अपनी घरवाली से खतरा हो गया"

इसके बाद मंच पर आईं चेतना बलहारा जिन्होंने 

"मेरे आंखों में देखोगे तो मुझको जान जाओगे
मेरी झूठी सी बातों को भी हंसकर मान जाओगे
मैं नजरें यूं चुराती हूं कि मुझको लाज आती है
ये नजरें मिल गईं तो तुम मुझे पहचान जाओगे"

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चेतना की शायरी 'इज़हार-ए-इश्क' की शायरी थी, इक़रार की शायरी थी, प्रेम और भावनाओं को अभिव्यक्ति देने वाली शायरी थी. खासतौर पर युवाओं को उनके शेर बेहद पसंद आए. इसके बाद मंच पर आए लखनऊ के ही शायर शाश्वत सिंह दर्पण. शाश्वत की शायरी प्रेम के सबसे बड़े रूपक राधा-कृष्ण पर केंद्रित रही. उन्होंने शेर पढ़ा,

"देखो तो कितनी भाई है कान्हा के हाथ में
राधा की जो कलाई है कान्हा के हाथ में
हैरत में पड़ गए हैं जमीन आसमान के लोग
पर्वत भी जैसे राई है कान्हा के हाथ में"

इसके बाद मंच संभाला हरियाणा से आए शायर विष्णु विराट ने. उनकी रील्स अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होती हैं. युवाओं के बीच वह खासे लोकप्रिय हैं. उन्होंने शेर पढ़ा,

"चाहत वाला जाल नजर आता होगा
पिछला वाला साल नजर आता होगा
अब तो बाल कमर तक आ पहुंचे होंगे
अब वो और कमाल नजर आता होगा"

मुशायरे की आखिरी शायरा शिखा पचौली ने अपने इस शेर के साथ इस महफिल का समापन किया,

"करने हैं सिंगार हमें जो करने हैं
फिर दुनिया को अखरे अगर अखरने हैं
सारे आंसू तुझपर जाया क्यों करने
हमने तेरे बाद भी दिलबर करने हैं"

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